कान महोत्सव में 'सेल्फ़ी बैन' का क्या असर?

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सेल्फ़ी के बिना आधुनिक जीवनशैली अधूरी मानी जाएगी. आपके आस पड़ोस मौजूद हर आम से लेकर ख़ास आदमी कभी न कभी सेल्फ़ी लेता दिखाई देता है.

हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री जब चीनी प्रधानमंत्री से मिलते हैं तो सेल्फ़ी लेते दिखे, जिसे दुनिया का सबसे पावरफ़ुल सेल्फ़ी माना जा रहा है.

सेलिब्रेटी सितारों को भी सेल्फ़ी लेने की आदत सी होती है.

ऐसे में फ़्रांस के कान फ़िल्म महोत्सव के डायरेक्टर थियरी फ्रेमॉक्स ने इस साल रेड कारपेट पर सेलीब्रेटी सितारों के सेल्फ़ी लेने पर अघोषित पाबंदी लगा दी.

इस पाबंदी का क्या असर हुआ?

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बीबीसी कल्चर की फ़िल्म कॉंट्रीब्यूटर एमा जोंस कहती हैं, "कान फ़िल्म महोत्सव में सेलीब्रेटी सितारों के सेल्फ़ी लेने पर हमें कभी आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि ये महोत्सव दुनिया में अपनी क्लास को लेकर संवेदनशील है. तो यहां आने वाला हर कलाकार सेल्फ़ी लेना चाहता है. मैंने कई कलाकारों को सेल्फ़ी लेते हुए देखा भी. तो मेरे ख़्याल से इस पाबंदी का कोई असर नहीं हुआ."

नहीं हुआ असर

एमा जोंस का आकलन एकदम सही है क्योंकि यहां आने वाले सितारों ने ख़ूब सेल्फ़ी ली है. इतना ही नहीं महोत्सव के दौरान सेल्फ़ी स्टिक बेचने वाले भी ख़ूब नजर आए.

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इसी सवाल के जवाब में फिल्म क्रिटिक निकोलस बारबर कहते हैं, "कान फ़िल्म महोत्सव में रेड कारपेट पर चलने वाले कलाकार भी इस मौके पर काफी उत्साहित होते हैं. ठीक है कि वे बड़े कलाकार हैं, लेकिन उनमें भी उत्साह होता है और इस उपलब्धि को वे सेलिब्रेट भी करना चाहते हैं. इसलिए मेरे ख़्याल से सेल्फ़ी लेने का उनका हक तो बनता है."

ज़ाहिर है फ़िल्म महोत्सव के डायरेक्टर थियरी फ्रेमॉक्स अपने उद्देश्य में कामयाब नहीं हुए. ऐसे में एक सवाल ये उभरता है कि कान फ़िल्म महोत्सव के निदेशक ने ये पाबंदी क्यों लगाई?

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इस सवाल के जवाब में एमा जोंस कहती हैं, "ये पाबंदी बहुत हद तक समय के प्रबंधन को लेकर व्यवहारिक सोच का नतीजा होगी. कारपेट पर देखिए कितने सारे स्टार आते हैं. उन्हें शायद डर रहा होगा कि इससे फ़िल्मों का प्रीमियर समय पर नहीं हो पाएगा. क्योंकि तस्वीर खिंचवाने और खींचने और उसे सोशल मीडिया पर शेयर करने में काफी वक्त खर्च होता है और इसका गंभीर सिनेमा में कोई योगदान भी नहीं है."

क्लास से लेना देना

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वहीं इसकी वजह बताते हुए निकोलस बारबर कहते हैं, "वैसे भी कान फ़िल्म महोत्सव क्लासी होने के तौर तरीके अपनाता है तो हो सकता है कि उन्हें लगा हो कि रेड कारपेट पर इस तरह से फ़ोटो लेना ठीक नहीं है, अच्छे टेस्ट का नहीं है."

एमा जोंस भी निकोलस से सहमति जताते हुए कहती हैं कि हो सकता है कि ये कान फ़िल्म महोत्सव का एक और एलीटिज़्म हो.

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बहरहाल जो भी हो, हकीकत यही है कि कान फ़िल्म महोत्सव के दौरान रेड कारपेट पर सेल्फ़ी लेने का चलन ख़ूब दिखा.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी कल्चर पर उपलब्ध है.

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