शांति के लिए 30 महिलाओं ने बॉर्डर लांघा

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तीस महिला कार्यकर्ताओं ने उत्तरी और दक्षिण कोरिया की सीमा के बीच मौजूद असैन्य क्षेत्र को पार लिया है. दोनों देशों के बीच शांति बहाल करने के इरादे से इन कार्यकर्ताओं ने सीमा पार की है.

यह महिलाएं उत्तर कोरिया से दक्षिण कोरिया की ओर गई हैं. लेकिन उन्हें दक्षिण कोरिया के पनुमजोम गांव से आगे नहीं बढ़ने दिया गया.

इसी गांव में कोरिया युद्ध के बाद 1953 में युद्धविराम संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे. अमरीकी नारीवादी ग्लोरिया स्टीनेम इस समूह का नेतृत्व कर रही हैं.

वहीं आलोचकों का कहना है कि इन महिलाओं ने उत्तरी कोरिया के मानवाधिकारों के बारे में सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा और उन्होंने उत्तर कोरिया के प्रोपागैंडा 'टूल' की तरह अपना इस्तेमाल होने दिया है.

इस समूह में शांति का नोबेल जीत चुकीं दो महिलाएं लाइबेरिया की लेमाह बोवी और उत्तरी आयरलैंड की मेरीड मैग्वायर शामिल हैं.

आरोपों को ग़लत बताया

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Image caption अभियान से पहले प्रेसवार्ता को संबोधित करतीं ग्लोरिया स्टीनेम

ग्लोरिया स्टीनेम ने उत्तर कोरिया के प्रोपागैंडा के तौर पर इस्तेमाल किए जाने के आरोपों का खंडन किया. उन्होंने कहा, ''हम सभी महिलाओं का ध्यान सीमाओं को तोड़ने पर है. जिससे लोग एक-दूसरे को जान सकें और उनके बीच संवाद स्थापित हो सके जो कि इस बंटवारे ने रोक रखा है.''

उन्होंने आगे कहा, ''मुझे पूरा यकीन है कि जब लोग वहीं महसूस कर पाएँगे जो इस दौरान हमने महसूस किया तो सभी आपत्तियां दूर हो जाएंगी.''

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