चीन: सैन्य मौजूदगी समुद्री सीमा से बाहर भी

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चीन अपनी सैन्य मौजूदगी को अपनी समुद्री सीमा के बाहर विस्तार करने पर ध्यान दे रहा है.

चीन का सामरिक रुप से महत्वपूर्ण एक दस्तावेज़ सामने आया है जिसमें ऐसा कहा गया है.

इस दस्तावेज़ को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता यांग याजुन ने सार्वजनिक किया.

जहाँ चीन ने उस पर 'मंडरा रहे खतरों को लेकर चेतावनी दी' है, वहीं ये भी कहा गया है- 'जब तक चीन पर हमला नहीं होता, चीन वापस हमला नहीं करेगा.'

दस्तावेज़ में कुछ “पड़ोसी देशों के उत्तेजक कदमों” और “साउथ चाइना सी के मामलों में बाहरी ताकतों के हस्तक्षेप” का उल्लेख है.

ग़ौरतलब है कि जिन दिन ये दस्तावेज़ रिलीज़ किया गया उसी दिन सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने कहा कि स्प्राटली द्वीपों पर चीन 50 मीटर ऊँचे दो लाइट-हाऊस बनाएगा. इन द्वीपों के लेकर चीन का वियतनाम और फ़िलिपींस के साथ विवाद चल रहा है.

साउथ चाइना सी का मसला

दस्तावेज़ के मुताबिक चीन की नौसेना सिर्फ़ तट की सुरक्षा के आगे खुले समुद्र में भी अपने हितों के लिए सुरक्षा व्यवस्था कायम करेगा.

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गंभीर सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए चीन सायबर सेना का तेज़ी से विकास करेगा.

कई देश चीन पर आरोप लगाते रहे हैं कि वो साउथ चाइना सी में आक्रामक तौर पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है. चीन के इन कदमों से अमरीका में भी चिंता है.

साउथ चाइना सी स्थित कई द्वीपों को लेकर फ़िलिपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रूनेई के साथ उसके विवाद हैं.

दस्तावेज़ के मुताबिक चीन चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान देगा: समुद्र, अंतरिक्ष, परमाणु शक्ति, सायबर स्पेस.

हाल के वर्षों में चीन अपनी नौसेना के आधुनिकीकरण पर ख़ासा ध्यान देता रहा है.

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