'बीफ़बाज़ी से नहीं...बयानबाज़ी से दिक्कत'

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भारत की आबादी क़रीब एक अरब 22 करोड़ है. इसमें से लगभग 55 करोड़ यानी 45 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो ख़ुद को दलित, आदिवासी, मुसलमान, ईसाई, बौद्ध समझते हैं.

इन 55 करोड़ को बीफ़ समेत किसी भी तरह का माँस खाने-न खाने से कोई आपत्ति नहीं.

न उन्हें ये दिलचस्पी है कि आप शाकाहारी हैं कि नहीं या आपमें से कोई सफ़ेद गाय का गोश्त क्यों नहीं खाता और काली भैंस का क्यों खा जाता है.

मुझे तो बस इतना मालूम है कि भारत में जितना भी और जैसा भी बीफ़ खाया जाता है उसकी एक हिस्सा वो मित्र खा जाते हैं जो मुसलमान नहीं हैं.

खाने पर ताकझांक

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यहाँ पाकिस्तान में हर तरह की ताकझांक है, पर कौन क्या खाता है इसकी किसी को ख़ास परवाह नहीं.

ब्राह्मण यहाँ देखने को नहीं मिलता. बनिया और ठाकुर भी आटे में नमक बराबर हैं. और ज़्यादातर हिन्दू जातियाँ पिछड़े वर्ग से हैं.

इसलिए मुस्लिम, ग़ैर-मुस्लिम के बीच और बीसियों मसले हैं मगर बीफ़ को लेकर कोई ऐसा झमेला नहीं कि सिरफुटौव्वल हो जाए.

बल्कि अक्सर झगड़ा ये रहता है कि कसाई की दुकान पर जो लटका हुआ है वो बीफ़ है या बीफ़ा का धोखा.

इसीलिए हर कसाई बीफ़ को असली बताने के लिए पशु की असली पूँछ भी लटका देता है ताकि ग्राहक को बिना पूछे इत्मीनान हो जाए कि ये गदहे का गोश्त बहरहाल नहीं है.

बीफ़बाज़ी और बयानबाज़ी

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मगर मुझे बीफ़बाज़ी से नहीं, श्री मुख़्तार अब्बास नकवी के बयानबाज़ी से दिक्कत है कि भारत में जो भी बीफ़ खाने के लिए मरा जा रहा है वो पाकिस्तान चला जाए.

इससे दो बातें तो तुरंत स्पष्ट हो गईं. एक ये कि नकवी साहब को कोई बताने वाला नहीं कि ब्राज़ील के बाद भारत विश्व में बीफ़ निर्यात करने वाला दूसरा बड़ा देश है.

दूसरा उन्हें शायद ये भी मालूम नहीं कि किसी भारतीय नागरिक को सीमापार बीफ़ यात्रा का कष्ट उठाने की बिल्कुल जरूरत नहीं. ये आनंद ख़ुद भारत के अंदर ही उपलब्ध है.

केवल रेल या बस का टिकट कटाकर पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर राज्यों या अरुणाचल प्रदेश, केरल, गोवा समेत किसी भी बीफ़ राज्य तक पहुँचने की तकलीफ़ कर लें.

वीज़ा की लाइन

वरना सोचिए 55 करोड़ लोग इस गर्मी में, जब चील भी अंडा छोड़ दे, पाकिस्तानी हाई कमीशन के बाहर कब तक क़तार में खड़े रहेंगे!

और भूतपूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर डीएन झा, गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू जैसे महान 'बीफ़ आशिक़' वीज़ा की लाइन में धक्के खाते अच्छे लगेंगे क्या!

और अगर पाकिस्तान सरकार ने ये शर्त लगा दी कि आप सबका भरपूर स्वागत मगर हमारा जासूस कबूतर भी साथ लेकर आएँ, तो क्या होगा...

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