कहाँ प्रॉपर्टी खरीदना है फ़ायदे का सौदा ?

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अगर आपके पास आयरलैंड में कॉटेज है, या दुबई में आलीशान बंगला है, या फिर एस्टोनिया की राजधानी टैलिन में अपार्टमेंट है, तो फिर आप ख़ासे निश्चिंत और प्रसन्न होंगे.

ऐसा क्या ख़ास है इन तीनों जगहों में ? दरअसल इन तीनों जगहों में प्रॉपर्टी के दाम दुनिया भर में सबसे तेज़ दर से बढ़ रहे हैं. पूरी दुनिया के प्रॉपर्टी बाज़ार पर नज़र रखने वाली संस्था ग्लोबल प्रोपर्टी गाइड (जीपीआई) के मुताबिक इन जगहों पर प्रॉपर्टी के दाम में सबसे ज़्यादा उछाल आया है.

2008 की आर्थिक मंदी के दौरान बाज़ारों में ख़ासी गिरावट आई थी लेकिन अब वहाँ हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं.

जीपीआई की इस सूची में पूरी दुनिया के 41 शहरों के रियल एस्टेट बाज़ारों का विस्तृत आकलन किया गया है.

तो सबसे ऊपर रही तीन जगहों के बाद उन जगहों पर आएँ जहाँ भूले-भटके भी प्रॉपर्टी ख़रीदना जोखिम से भार हो सकता है.

इस लिस्ट में सबसे नीचे है यूक्रेन का कीएफ़, फिर रूस और उससे ऊपर लेकिन लिस्ट में नीचे से तीसरे नंबर पर है चीन.

शायद सुनकर हैरानी हो लेकिन दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था चीन में आजकल प्रॉपर्टी का हाल ज़्यादा अच्छा नहीं.

एक नज़र उन तीन जगहों पर जहाँ प्रॉपर्टी मार्केट में बढ़ रही है.

1. आयरलैंड

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सेल्टिक टाइगर के नाम से मशहूर आयरलैंड पर 2008 की आर्थिक मंदी का ख़ासा बुरा असर पड़ा. लेकिन इसके बाद यहां की अर्थव्यवस्था लगातार मज़बूत होकर उभरी है.

सरकार की ओर से मिलने वाली कर छूट ने भी इसमें योगदान दिया है. गूगल और पेपाल जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों के क्षेत्रीय दफ़्तर खुलने की वजह से यहां लोग बड़ी संख्या में घर खरीदने के प्रति आकर्षित हुए हैं.

ग्लोबल प्रापर्टी गाइड के प्रकाशक मैथ्यू मोंटेगू पोलॉक के मुताबिक आयरलैंड की अर्थव्यवस्था मज़बूती से बढ़ रही है. यही वजह है कि ये देश दुनिया में घर खरीदने के लिहाज़ से सबसे बेहतर माना जा रहा है. ग्लोबल प्रॉपर्टी गाइड के मुताबिक 2014 में वहाँ प्रॉपर्टी की कीमत 16.5 फीसदी बढ़ी हैं.

कीमतें बढ़ने के साथ यहां नए मकानों के निर्माण का सिलसिला भी तेज़ी पर है. मैथ्यू पोलॉक ने कहा, "मुझे नहीं लगता था कि डब्लिन में इतनी नई इमारतों को बनाना संभव है, नई कन्सट्रक्शन के कारण डब्लिन भी तेज़ी से फैल रहा है."

वैसे आयरलैंड में रियल एस्टेट की कीमतों में नाटकीय उछाल और उसमें भारी गिरावट का पुराना इतिहास रहा है.

2. दुबई, संयुक्त अरब अमीरात

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दुबई की हाउसिंग मार्केट भी 2008 में धाराशायी हो गई थी. रातों रात ज़मीन-जायदाद की कीमत आधी हो गई थी.

हज़ारों डॉलर के निवेश वाले हाउसिंग प्रोजेक्ट रातों रात बंद हो गए. निवेशकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा.

जब आर्थिक मंदी के बाद दुनिया में स्थिति सुधरने लगी तो दुबई के रियल एस्टेट ने तेज़ी पकड़ी. 2014 में यहां के मकानों की कीमतों में 13 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी देखने को मिली. हालांकि 2015 में कुछ नरमी दिखाई पड़ी है.

अप्रैल 2015 में अप्रैल, 2014 के मुकाबले में आधे ही मकान बिके हैं. डिलॉइट के मुताबिक जब आंकड़े उपलब्ध होते हैं तो दुबई में 2015 की पहली छमाई में घरों की कीमतों में 1-5 फीसदी की गिरावट देखने को मिल सकती है.

लेकिन ज़मीन जायदाद की बढ़ती कीमतों की रैंकिंग में दुबई का दूसरे नंबर है क्योंकि अभी भी टैक्स में छूट के लिहाज़ से ये स्वर्ग जैसा ही है. रियल एस्टेट सूचना की कंपनी रेडिन के सीईओ अहमत कायहान के मुताबिक दुबई का बाज़ार 2008 से काफी अलग है.

दुबई में सेंट्रल बैंक ने कर्जे देने के प्रावधानों को सख़्त किया है और सरकार ने डेवलपरों के नए प्रोजेक्ट को लांच करने के लिए नियम भी कड़े किए हैं.

इससे आपूर्ति सीमित हुई है. ऐसी परिस्थितियों में भी कीमतें बढ़ जाती हैं.

3. एस्टोनिया, टैलिन

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2008 की आर्थिक मंदी के बाद पूरा यूरोप पटरी पर आ रहा है. लेकिन एस्टोनिया के मकानों की कीमतें तेज़ी से बढ़ रही हैं. 2014 में मकानों की कीमतें यहां 12.6 फ़ीसदी बढ़ी हैं.

आर्थिक सुधार के अलावा एस्टोनियाई अख़बार द पोस्टीमेस के मुताबिक युवा पीढ़ी में घर की मांग बढ़ी है. एस्टोनिया के सोवियत संघ से स्वतंत्र होने के बाद यहां युवा परिवारों की संख्या काफी बढ़ी है और बैंक घर खरीदने के लिए सहज ढंग से कर्जे भी दे रहे हैं.

चीन- नीचे से तीसरा

चीन की अर्थव्यवस्था भले ही दुनिया में सबसे तेज़ रफ़्तार से बढ़ रही हो, लेकिन घरों की कीमत तो घट रही है. 2014 में यहां मकान की कीमतें 5.7 फीसदी घटी हैं.

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रियल एस्टेट की कीमतों के नहीं बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ये है कि चीन में काफी ज्यादा मकान उपलब्ध हैं. मांग से ज्यादा उपलब्धता की वजह से यहां के मकानों की कीमत ज्यादा नहीं बढ़ी.

पिछले साल की तरह से इस साल भी औसत मकान की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है. कायहान ने कहा, "बाज़ार के आंकड़ों के मुताबिक बीजिंग के बाज़ार में जल्दी सुधार होने की उम्मीद नहीं है."

रूस- नीचे से दूसरा

ग्लोबल बाजार में हो रहे बदलावों के चलते रूस में रियल एस्टेट का बाज़ार मंदा चल रहा है. तेल की कीमतों में गिरावट के कारण पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग देश की अर्थव्यवस्था का ख़ासा धक्का लगा है.

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इसके अलावा डॉलर के मुक़ाबले रूबल की गिरती कीमत के कारण भी यहां संपत्ति के दाम नहीं बढ़ रहे हैं.

रूबल की सेहत को सुधारने के लिए ब्याज़ दरों में भी बढ़ोत्तरी की गई है. 2014 में ब्याज़ की दर 17 फ़ीसदी हो गई थी, जिसके चलते मकान की कीमतों को फ़र्क पड़ा.

2014 में यहां की संपत्तियों की कीमत में 6 फ़ीसदी की गिरावट आई.

मैथ्यू मोंटेगू पोलॉक कहते हैं, "रुस में संपत्ति की कीमतें लगातार कम हो रही हैं और इसमें और गिरावट देखने को मिलेगी."

दो साल पहले ही फोर्ब्स के एक लेखक ने अर्नेस्ट एंड यंग की रिपोर्ट में रूस को रियल एस्टेट मार्केट के नजरिए से हॉट बताया था लेकिन अगले साल कीमतें गिरने लगीं.

कीएफ़, यूक्रेन- सबसे नीचे

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जिन 41 जगहों के रियल एस्टेट बाज़ार का आकलन किया गया है, उनमें यूक्रेन सबसे निचले पायदान पर है. हैरानी इसलिए नहीं होनी चाहिए क्योंकि उसके कुछ इलाक़ों में कुछ ही महीने पहले जंग के बादल और फ़िल रह-रहकर हिंसा हो रही थी.

इक्विटी फर्म सिग्माब्लेयजर की मासिक रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन की अनिश्चित राजनीतिक स्थिति के चलते वहां का सामाजिक और आर्थिक तानाबाना भी चरमरा गया है.

वहां की मुद्रा का मूल्य भी लगातार कम होता जा रहा है. कीएफ़ में 2014 में मकानों की कीमतों में 49 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी, 2015 में हालात के बेहतर होने की उम्मीद नहीं है.

बैंकों से मिलने वाले कर्ज की दर 2014 में 21.8 फ़ीसदी दर्ज की गई.

कायहान कहते हैं, "रूस और यूक्रेन में राजनीतिक कारणों से रियल एस्टेट का बुरा हाल हुआ. जब तक हालात नहीं बदलते रियल एस्टेट के बाज़ार में सुधार नहीं होगा."

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

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