तुर्कीः चुनाव में एर्दोआन को झटका

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तुर्की में सत्तारूढ़ एकेपी पार्टी को 13 सालों में पहली बार बहुमत गंवाना पड़ा है.

राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन अपनी ताक़त में इज़ाफ़ा करना चाहते थे. एर्दोऑन ने 2003 में बतौर प्रधानमंत्री सत्ता संभाली थी. बीते साल वो राष्ट्रपति चुने गए थे.

तुर्की में राष्ट्रपति प्रणाली लागू करने के लिए उन्हें दो-तिहाई बहुमत की ज़रूरत थी. लेकिन इन चुनावों से उन्हें तगड़ा झटका लगा है.

तुर्की की संसद में बहुमत के लिए 276 सीटें चाहिए. लेकिन एकेपी की 258 सीटें मिलने की संभावना है.

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ऐसे में या तो एकेपी को अल्पमत की सरकार बनानी होगी या किसी दूसरी पार्टी से गठबंधन करना होगा.

इस्तांबुल से बीबीसी संवाददाता मार्क लोवेन का कहना है कि एकेपी के मुख्यालय में माहौल मायूसी वाला है, लोगों के चेहरे उतरे हुए हैं.

राष्ट्रपति एर्दोआन की पार्टी में अब तीखे सवाल पूछे जाएंगे और ये जानने की कोशिश होगी कि पार्टी की ऐसी हालत क्यों हुई.

नतीजे से हैरानी

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हालांकि प्रधानमंत्री अहमत दवतोगलू का कहना है कि 41 फ़ीसदी वोट के साथ एकेपी ने चुनाव जीता है.

तुर्की में चुनाव नतीजे से दुनिया भर को हैरानी हुई क्योंकि कुर्द समर्थक एचडीपी या पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी पहली बार दस फ़ीसदी से ज़्यादा वोट हासिल करने में कामयाब रही.

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इस पार्टी को संसद में पहुंचने के लिए दस फ़ीसदी वोट पाना ज़रूरी था. पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता सलाहत्तीन देमिरतास ने कहा कि उनकी पार्टी को तमाम मुश्किलों के बावजूद जीत मिली है.

कुर्दों की नई सुबह

दक्षिण पूर्वी तुर्की में तीस साल से अलग कुर्दिस्तान के लिए जारी संघर्ष में 40 हज़ार लोग जान गंवा चुके हैं.

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Image caption चुनाव के नतीजों से तुर्की के डेढ़ करोड़ कुर्दों की राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ेगी भागीदारी.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इन नतीजों से तुर्की के डेढ़ करोड़ कुर्द लोगों को राष्ट्रीय राजनीति में आवाज़ मिलने की उम्मीद है.

एचडीपी वामपंथी, पर्यावरणवादी और समलैंगिकों को अपनी ओर खींचने में भी कामयाब रही. एक अन्य एचडीपी समर्थक का कहना था कि नतीजों का मतलब होगा कुर्दों के लिए तुर्की में एक नई सुबह.

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