मेंढक बन जाते हैं चींटियों का शिकार?

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अमरीका के दक्षिणी हिस्से में पाए जाने वाले मेंढक की प्रजाति को सबसे बड़ा ख़तरा इलाके की आक्रामक चींटियों की प्रजाति से है.

अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ्लोरिडा की मुख्य शोधकर्ता आंद्रे लाँग कहती हैं, "ये पहला अध्ययन है जो बताता है कि मेंढकों को लाल चीटियों से ख़तरा है."

इस शोध के नतीजे बायोलॉजिकल इनवेशन्स जर्नल में प्रकाशित हुए हैं.

दरअसल यह देखा गया है कि दक्षिणी हिस्से में पाए जाने वाले मेंढक रेड इंपोर्टेड फायर एंट (सोलेनोपसिस इनविक्टा) को खाने की कोशिश करते हैं और चींटी के ज़हर से उनकी मौत हो जाती है या फिर घायल हो जाते हैं.

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कितना बड़ा है ख़तरा?

रेड इंपोर्टेड फायर एंट दक्षिणी अमरीका में पाई जाती हैं जो 1900 की शुरुआत में अमरीका के दक्षिण पूर्वी हिस्से में भी पहुंच गए. इनकी मौजूदगी के बाद ही हस्टन मेंढक (बूफो हस्टोनेसिस) और सालामैंडर प्रजाति के मेंढकों की प्रजाति पर ख़तरा बढ़ा.

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वैज्ञानिकों के मुताबिक अब दक्षिणी हिस्से में पाए जाने वाले मेंढक लाल आक्रामक चींटी और बिना ख़तरे वाली चींटी की पहचान करने लगे हैं.

शोध दल के वैज्ञानिकों ने इन मेंढकों के हाव भाव को लाल चींटी, बिना ज़हर वाली चीटीं और बिना किसी चींटी के वातावरण में रखने के बाद वीडियो कैमरे से रिकॉर्ड किया.

लाल चीटिंयों वाले इलाके में मेंढकों ने करीब 35 फ़ीसदी कम वक्त बिताया. लेकिन स्थानीय पिरामिड चींटियों को मेंढकों ने खाने की ख़ूब कोशिश की. लाल चीटिंयों के साथ ऐसा एक बार ही हुआ.

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नतीजे बताते हैं कि मेंढक ख़तरनाक लाल चींटियों और बिना ख़तरे वाली चींटियों की पहचान करने लगे हैं और इन दोनों प्रजातियों के सामने उनका व्यवहार बदल जाता है.

ख़तरों को भांपने का गुण

लाँग कहती हैं, "ऐसा लगता है कि बीते 50 सालों से लाल चींटियों को मेंढक अपने शिकारी के तौर पर देख रहे हैं."

शोधकर्ताओं के मुताबिक मेंढक चींटियों के ख़तरे को भांप लेते हैं या फिर उन्हें कोई रासायनिक संकेत मिलते हैं या फिर इन दोनों की मदद से भी ऐसा हो सकता है.

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शोध करने वालों ने लिखा है, "हिंसक और नुकसान पहुंचाने वाली प्रजातियों से होने वाले ख़तरों को भांपने के गुण विकसित नहीं करने पर जीव की प्रजाति को ख़तरा बढ़ जाता है. कई प्रजातियां तो इसके चलते विलुप्त होने के कगार तक पहुंच गई हैं."

ऐसे में ज़ाहिर है कि अमरीका के दक्षिण हिस्से में पाए जाने वाले मेंढक लाल चींटियों के ख़तरे से निपटने के लिए उससे दूर रह रहे हैं, इससे उनके अस्तित्व पर फिलहाल कोई ख़तरा नहीं दिख रहा है हालांकि उन्हें पेट भरने के लिए कहीं ज़्यादा भटकना पड़ रहा है.

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आंद्रे लाँग कहती हैं, "दुनिया भर के जीवों पर इस तरह का हिंसक ख़तरा बढ़ा है, ऐसे में जीव कैसे अपनी प्रजाति को बचा रहे हैं, इसे जानना भी अहम है."

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी अर्थ पर उपलब्ध है.

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