चीन में बिक रहा था 40 साल पुराना गोश्त

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चीन में कस्टम के बहु प्रचारित छापों के बाद खाद्य सुरक्षा के स्तर को लेकर एक बार फिर चिंताएं उभर आई हैं.

सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ की ख़बर के अनुसार चांग्शा, हुन्नान प्रांत में कस्टम विभाग ने छापे मारकर 'करीब 10.17 करोड़ रुपये कीमत' का 800 टन फ़्रोज़न मीट ज़ब्त किया है.

पैकेजिंग की तारीख के अनुसार यह मीट 30 या 40 साल पुराना था.

ताज़ा घोटाले के बाद सोशल मीडिया पर फ़ूड हाइजीन के स्तर को लेकर बहस शुरू हो गई है और कुछ लोग सरकार से बेहतर खाद्य सुरक्षा नियम लागू करने की मांग कर रहे हैं.

हाल के कुछ सालों में चीन में खाने से जुड़े कई घपले हुए हैं जिनमें 2008 का मेलामाइन दूध वाला मामला भी शामिल है, जिससे करीब 3,00,000 बच्चे प्रभावित हुए थे.

'प्रतिरोधक क्षमता'

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एक करोड़ लोगों ने 23 जून को शिन्हुआ न्यूज़ एजेंसी की ख़बर पढ़ी जिसका शीर्षक था, "तस्करी किया हुआ 'मुर्दा गोश्त' आपकी टेबल पर, दोष किसका?"

इस लेख में कहा गया है, "हुन्नान के इतिहास में फ्रोज़न खाने की तस्करी का सबसे बड़ा मामला है" जिसमें "30 से 40 साल पुराना" गोश्त ज़ब्त किया गया है.

चांग्शा कस्टम ब्यूरो के पुलिसकर्मी को यह कहते हुए उद्धृत किया गया है, "यह बदबू मार रहा था. वहां इसका पूरा कंटेनर था. मैंने दरवाज़ा खोला तो करीब-करीब उल्टी ही कर दी."

इस लेख में विस्तार से बताया गया है कि 3,000 स्क्वेयर मीटर के क्षेत्र में फ़्रोज़न बीफ़, बतख की गर्दनें और मुर्गे की टांगों को फ्रीज़रों में रखने का इंतज़ाम था जो "कंटेनरों में पैक थी और उन पर विदेशी भाषा में लिखा हुआ था."

बीस लोगों को गिरफ़्तार किया गया है जिनमें तीन लोग अन्य चीनी प्रांतों से हैं. माना जा रहा है कि यह गोश्त हुन्नान के साथ ही देश भर के अलग-अलग इलाकों में वितरित किया जा रहा था.

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शिन्हुआ का यह लेख जल्द ही चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म साइना वीबो पर सबसे ज़्यादा पढ़े जाना वाला लेख बन गया. हज़ारों नेटिज़न इसे #स्मगल्डकॉर्प्समीट हैशटैग के साथ इसे शेयर कर रहे थे.

कई यूज़र्स ने मज़ाक किया कि "चीनी लोगों में बहुत पहले से सड़े हुए खाने के लिए प्रतिरोधक क्षमता है" (यूज़र हिपहॉप-2013). एक यूज़र बाइज़ैन्टाइन एच ने लिखा कि देश ने एक 'एंटीक़' खोज निकाला है और "इसे सरकार को सौंप दिया जाना चाहिए."

बढ़ी तस्करी

कई वीबो यूज़र्स ने खाद्य सुरक्षा को लागू करने के ढीले नियमों पर गुस्सा भी व्यक्त किया.

यूज़र "शिनकाइ वीआईपी" ने लिखा, "ऐसा एक-दो बार हो चुका है.... खाद्य सुरक्षा (नियमन प्राधिकरण) इस समस्या की ज़िम्मेदारी कब लेगा?"

एक और यूज़र 'लु शियांग लैंग किंग' ने नियमों को 'पूरी तरह अनियंत्रित' करार दिया और कहा कि "इसके सबूत हैं कि ड्रग और फ़ूड रेगुलेटरी अथॉरिटी नाकाम हो गई है."

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चीन में खाद्य सुरक्षा घोटाले नए नहीं हैं. सबसे ज़्यादा चर्चित मामला 2008 का है जब दूषित शिशु भोजन देश भर में वितरित हो गया था जिससे छह शिशुओं की मौत हो गई थी और 3,00,000 अन्य प्रभावित हुए थे.

अन्य चीज़ों के साथ ही उस उत्पाद की आपूर्ति घटने की वजह हाल के सालों में चीन में खाद्य पदार्थों की तस्करी के मामले बढ़े हैं. मार्च 2013 में 45 लोगों को हॉंगकॉंग में गिरफ़्तार किया गया, उन पर मेनलैंड से शिशु भोजन की तस्करी का आरोप था.

चीन में खाने की चीज़ों के बढ़ती कीमतें भी खाद्य पदार्थों की तस्करी की एक मुख्य वजह है. अंग्रेज़ी में छपने वाले सरकारी अख़बार चाइना डेली की ख़बर के अनुसार अप्रैल 2014 में चलन 'बढ़ रहा' था.

इसने कस्टम विभाग के एक सामान्य प्रशासक को यह कहते हुए उद्धृत किया, "चीन और अन्य देशों में, जैसे कि कुछ अफ़्रीकी और दक्षिणपूर्वी देशों में कीमतों में बड़ा अंतर मुख्यतः तस्करी में तेजी से बढ़ोतरी की वजह बना है."

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ऐसा लगता है कि शिन्हुआ की ताज़ा ख़बर ने चीनी लोगों की दुखती रग को छेड़ दिया है, क्योंकि इससे यह भी लगता है कि यह समस्या राष्ट्रीय है और इसमें ख़तरनाक बीमारियों जैसे कि फ़ुट-एंड-माउथ और मैड काउ डिज़ीज़ के विषाणु हो सकते हैं.

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