'यहां भ्रष्टाचार है, पर भारत जितना नहीं'

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लातिन अमरीकी देश ग्वाटेमाला में 62 ओसवाल्डो ओचोआ भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ प्रतीक बन गए हैं.

उन्होंने बीते दिनों बिना कुछ खाए अकेले 200 किलोमीटर लंबा सफ़र तय किया. उनका कहना है कि वो अपने देश में साफ़ और स्वच्छ सरकार के लिए लड़ रहे हैं.

सुनिए: जहां 'भ्रष्टाचार है संस्कृति का हिस्सा'

भ्रष्टाचार पर नज़र रखने वाली संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशन का कहना है कि भ्रष्टाचार सिर्फ़ ग्वाटेमाला नहीं, बल्कि लातिन अमरीकी क्षेत्र के दो तिहाई देशों के लिए एक बड़ी समस्या है.

बावजूद इसके कुछ विश्लेषक लातिन अमरीका में हालात भारत और चीन से बेहतर बताते हैं.

पढ़िए पूरी रिपोर्ट

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ब्राज़ील में इसी साल मार्च में 15 लाख और फिर अप्रैल में छह लाख से ज़्यादा लोगों ने सरकार के ख़िलाफ़ ज़ोरदार प्रदर्शन किए.

वहां हाल में भ्रष्टाचार के दो बड़े मामले सामने आए हैं.

कई बड़े राजनेताओं पर तेल कंपनी पेत्रोब्रास से रिश्वत लेने के आरोप लगे तो निर्माण कंपनी ओदरब्रेश्ट के मुखिया को भी भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ़्तार किया गया.

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के मुताबिक़ लातिन अमरीका में भ्रष्टाचार को लेकर सबसे ख़राब स्थिति वेनेजुएला और हैती की है.

हालांकि इसी क्षेत्र में चिली और उरुग्वे जैसे देश भी हैं जहां भ्रष्टाचार और पारदर्शिता का स्तर लगभग यूरोपीय देशों जैसा ही है. लेकिन बाक़ी देश इस मामले में अभी बहुत पीछे हैं.

भारत से तुलना

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Image caption राष्ट्रपति दिल्मा रुसेफ पेत्रोब्रास कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में रह चुकी हैं

ब्राजील के साओ पाओलो में रह रहे वरिष्ठ पत्रकार शोभन सक्सेना का कहना है कि लातिन अमरीका में भ्रष्टाचार की मौजूदगी से वो इनकार नहीं करते हैं, लेकिन इसका स्तर वैसा नहीं है जैसा भारत में पाया जाता है.

वो बताते हैं, “भारत और चीन से तुलना करें तो यहां सरकारी दफ़्तरों में आम लोगों को रिश्वत नहीं देनी पड़ती. ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट जैसी चीज़ों में यहां भ्रष्टाचार नहीं है. आम आदमी को भ्रष्टाचार का सामना नहीं करना पड़ता है.”

वो कहते हैं, “यहां भ्रष्टाचार की समस्या उच्च स्तर पर है. इसका संबंध बड़ी-बड़ी राजनीतिक पार्टियों और औद्योगिक घरानों से है. ये पूरा मामला चुनावों की फंडिंग से जुड़ा हुआ है.”

वो कहते हैं, “जिस तरह के मामले भारत में सुनने को मिलते हैं, यहां वैसा नहीं है. 2जी घोटाले में 40 अरब डॉलर के नुकसान की बात कही गई थी जबकि यहां होने वाला सबसे बड़ा घोटाला है पेत्रोबास का, वो दो अरब डॉलर का घोटाला बताया गया है.”

'भ्रष्टाचार संस्कृति का हिस्सा'

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भ्रष्टाचार की बात करें तो लातिन अमरीकी क्षेत्र के लिए ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के क्षेत्रीय समन्वयक मैक्स हेयवुड का कहना है, “ लातिन अमरीकी क्षेत्र में वेनेजुएला और हैती सरकारी क्षेत्र के भ्रष्टाचार से सबसे ज़्यादा प्रभावित देश हैं.”

“हम शून्य से 100 अंक के पैमाने पर भ्रष्टाचार को आंकते हैं जहां 100 अंक पाने वाले देश की सरकार को स्वच्छ माना जाता है. लेकिन इस पैमाने पर लातिन अमरीका के अधिकतर देश 50 अंक से ऊपर नहीं बढ़ पाते हैं. इसका मतलब है कि क्षेत्र के दो तिहाई देशों में भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या है.”

हेयवुड का कहना है कि उन्हें अकसर ये सुनने को मिलता है कि भ्रष्टाचार तो लातिन अमरीका की संस्कृति का हिस्सा है.

पत्रकार शोभन सक्सेना कहते हैं कि लातिन अमरीका में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर पश्चिमी संस्थाओं के अपने पूर्वाग्रह भी होते हैं.

वो कहते हैं, “ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की समस्या ये है कि वो कारोबार के लिए आने वाली पश्चिमी कंपनियों के नज़रिए से भ्रष्टाचार को देखते हैं. पश्चिम कंपनियां कहीं जाती हैं तो चाहती हैं कि उनके लिए रेड कारपेट बिछा दिया जाए. लेकिन यहां कई नियम बहुत कड़े हैं.”

“लेबर लॉ सख़्त हैं. पश्चिम देशों की तरह ‘हायर एंड फायर’ यहां नहीं कर सकते हैं. वो इसे भ्रष्टाचार की तरह देखते हैं और मानने लगते हैं सरकार हमसे पैसा चाहती है.”

असमानता

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Image caption लातिन अमरीका में नशीली दवाओं की तस्करी को कई जानकार सीधे भ्रष्टाचार से जोड़कर देखते हैं

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के मैक्स हेयवुड कहते हैं कि अगर कोई रिश्वत दे रहा है तो कोई उसे ले रहा है और इसके बदले रिश्वत देना वाला ज़रूर सरकार से अनुचित फ़ायदा हासिल करना चाहेगा.

वो कहते हैं, “भ्रष्टाचार आम ज़िंदगी को प्रभावित करने लगा है. स्वास्थ्य सुविधाओं का ना होना, अपराध का स्तर बढ़ना, अच्छी शिक्षा न मिल पाना जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. आपको पता होगा कि लातिन अमरीका पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा अपराधिक दर वाला क्षेत्र है.”

वो कहते हैं कि भ्रष्टाचार की समस्या न सिर्फ़ क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, बल्कि सरकारों की पारदर्शिता को भी प्रभावित कर रही है.

वो कहते हैं, “लातिन अमरीका दुनिया के उन क्षेत्रों में से एक है जहां असमानता सबसे ज्यादा है और इसका सीधा सरोकार भ्रष्टाचार है. अगर सरकार जवाबदेह नहीं होगी और कंपनियां स्वच्छ तरीके से कारोबार नहीं करेंगी तो इससे असमानता और बढ़ेगी.”

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