कामकाजी महिलाओं की बेटियों का करियर बेहतर?

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कामकाजी महिलाओं की बेटियां भी बेहतर नौकरी पाती हैं, जबकि उनके बड़े बेटे घर के कामों में अधिक हाथ बंटाते हैं.

हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में पाया गया है कि घरेलू महिलाओं के मुक़ाबले कामकाजी महिलाओं की बेटियों का करियर बेहतर होता है.

इस अध्ययन में 24 देशों को शामिल किया गया था, लेकिन यह नतीज़ा खासकर ब्रिटेन और अमरीका के लिए है.

इस शोध की मुखिया कैथलीन मैकगिन के मुताबिक़, “नौकरी करने वाली महिलाएँ अक्सर अपने बच्चों के लिए भविष्य के ख़तरे का संकेत भांप जाती हैं.”

इंटरनेशनल सोशल सर्वे प्रोग्राम में 2002 से लेकर 2012 तक के आंकड़ों के नतीजे बताते हैं कि कामकाजी महिलाओं की बेटियां अपने समकक्षों से 4 प्रतिशत अधिक तनख्वाह पाती हैं.

बेटों भी होते हैं पॉजिटिव

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इस अध्ययन में यह भी पाया गया है कि कामकाजी महिलाओं की तीन में से एक बेटी प्रबंधकीय पद पर थी, जबकि घरेलू महिलाओं की बेटियों में यह अनुपात चार में एक था.

अध्ययन के मुताबिक़, “ये नतीज़े बताते हैं कि कामकाजी महिलाएं अपनी बेटियों को ऐसे हुनर सिखाती हैं जो उन्हें उनके भविष्य में और नेतृत्व के पदों पर सफल बनाता है.”

हालांकि इसमें नौकरीशुदा मातृ पक्ष और वयस्क बेटों के कामकाजी ढर्रे के बीच संबंध का पता नहीं चलता.

हालांकि कामकाजी महिलाओं के बेटों में देखा गया है कि वो अपने परिवार की देखभाल में ज़्यादा समय गुजारते हैं, बनिस्बत घरेलू महिलाओं के बेटों के.

इस अध्ययन से नतीजा निकाला गया है, “पूरी दुनिया के पैमाने पर महिलाएं अधिकाधिक कामकाजी हो रही हैं, लेकिन इसी के समानांतर पुरुषों का घरेलू कामों में हाथ बंटाने की रफ़्तार धीमी है.”

घर के कामों का महिलाओं पर अधिक भार होने से सार्वजनिक ज़िंदगी में उनके विकल्प भी सीमित हो जाते हैं.

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