कब आ रहा है भविष्य बताने वाला ऐप?

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भविष्य अनिश्चित होता है. लेकिन अगर आपको उसके बारे में पहले से जानकारी हो जाए तो सोचिए जीवन कितना बदल जाएगा.

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या ऐसा होगा भी? डिज़िटल युग में इस दिशा में काम भी शुरू हो चुका है और उम्मीद की जा रही है कि एक दिन वाकई ऐसा हो सकता है.

यह कल्पना इसराइली डिजिटल वैज्ञानिक आयल गेवेर की है. उन्होंने बीबीसी फ़्यूचर के कार्यक्रम फोरम में अपने इस आइडिया के बारे में विस्तार से बताया.

गेवेर ने कहा, "दरअसल मैं दुनिया को बदलना चाहता हूं, वो भी एक क्रिस्टल बॉल ऐप की मदद से. ये ऐसा उपकरण होगा जिससे आपको भविष्य के बारे में अंदाज़ा हो सकता है."

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ऐसे में जेहन में ये सवाल जरूर कौंधता है कि क्या बला है ये क्रिस्टल बॉल. इसके बारे में गेवेर बताते हैं, "दुनिया भर में जितना डाटा मौजूदा है, उस सबको जब एक ब्लैक बॉक्स में डाल देंगे तो वह एक क्रिस्टल बॉल बन जाएगा."

नॉलेज नेटवर्क का कमाल

गेवेर के मुताबिक जब नॉलेज ही नेटवर्क बन जाएगा तो सब कुछ संभव होगा, भविष्य को जानना भी.

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इसके बारे में गेवेर बताते हैं, "जब उपलब्ध सारी जानकारी मौजूद होगी, तब हम एक बेहद स्मार्ट एलगॉरिदम विकसित करेंगे. ये एलगॉरिदम मानवीय व्यवहार और उपलब्ध कंटेट का आकलन करके भविष्य के बारे में डाटा मुहैया कराएगा."

गेवेर के मुताबिक आपके अतीत, वर्तमान के बारे में सब कुछ जानते हुए भविष्य का आकलन सेकेंडों में संभव होगा.

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गेवेर यहीं नहीं ठहरते. उनकी कल्पना की उड़ान आगे तक पहुंचती है. वे कहते हैं, "अगर क्रिस्टल बॉल के साथ एक सुपर टूल का इस्तेमाल किया जाएगा तो हमें भविष्य की चुनौतियों के हल में भी मदद मिलेगी. भविष्य के आकलन के बाद ये टूल हमें भविष्य के मुताबिक दो काम करने की सलाह भी देगा."

गेवेर के मुताबिक इन दोनों सलाहों में कोई विकल्प चुनने पर क्या क्या हो सकता है, यह भी ऐप बता देगा.

हालांकि ब्रिटिश वैज्ञानिक एडमंड डि वॉल इस आइडिया पर सवाल उठाते हुए फोरम कार्यक्रम में नॉलेज और डाटा के बीच कनेक्शन सवाल उठाए हैं.

कब तक हो पाएगा ये संभव?

इसका जवाब देते हुए गेवेर कहते हैं, "किसी घटना और परिस्थिति के कनेक्शन की जानकारी नॉलेज कहलाती है. इसको डाटा के तौर पर एकत्रित करने से ये आइडिया लगाया जा सकता है कि उसी परिस्थिति में दोबारा क्या होगा."

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अमरीकी गणितज्ञ रॉबर्ट कैपलान के मुताबिक यह आइडिया एक तरह से लाइब्रेरी को ऑनलाइन करने जैसा है.

वैसे इस आइडिया की सबसे बड़ी मुश्किल क्या है. दुनिया भर के डाटा को स्टोर करने वाले डिवाइस की क्षमता क्या होगी और अगर ऐसा कोई डाटा कार्ड बनता भी है तो क्या सारी जानकारी एक साथ उस कार्ड में रखना संभव होगा.

ये संभव हो गया तो क्या ऐसा डिवाइस हर किसी के पास पहुंच पाएगा?

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.

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