'ग्रीस दिवालिया तो एक ट्रिलियन यूरो का फटका'

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आर्थिक संकट में घिरे ग्रीस ने अपने यहां आर्थिक बेलआउट पैकेज पर जनमत संग्रह से पहले यूरोज़ोन को बड़े नुक़सान की चेतावनी दी है.

ग्रीस में रविवार को आर्थिक बेलआउट पैकेज की शर्तों पर जनमत संग्रह हो रहा है.

ग्रीस के वित्त मंत्री यानिस वारूफाकिस ने चेताया है कि अगर उनके देश को मदद नहीं मिली और देश दिवालिया हुआ तो यूरोज़ोन के अन्य देशों को एक हज़ार अरब यूरो का नुक़सान होगा.

स्पेन के अख़बार 'एल मुंडो' को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के नेता ग्रीस के साथ जो कर रहे हैं, वो चरमपंथ के समान है.

हालांकि जर्मनी के एक अख़बार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जनमत संग्रह का फैसला जो भी हो सोमवार तक ग्रीस अपने कर्ज़दाताओं के साथ समझौते तक पहुंच जाएगा.

ग्रीक सरकार बेलआउट में 'वित्तीय अनुशासन' की शर्तों को बेहद कड़ा मानती हैं जबकि यूरोपीय संघ उनमें रियायत देने को राज़ी नहीं है.

'मुश्किल मतपत्र'

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इस बीच, ग्रीस के प्रधानमंत्री एलेक्सिस त्सिप्रास ने राजधानी एथेंस में अपने लगभग 25 हज़ार समर्थकों को संबोधित करते हुए संकट से निकलने के अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव की शर्तों को अस्वीकार करने की अपील की.

हालांकि, सरकार समर्थक रैली के पास ही हुई दूसरी बड़ी विरोध रैली में चेतावनी दी गई कि अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव को अस्वीकार करने का मतलब ग्रीस का यूरोजोन से बाहर हो जाना होगा.

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ग्रीक चैम्बर ऑफ कॉमर्स के महासचिव निकोसा सोफियानोज ने आशंका जताई कि इस बेलआउट से जुड़ी जटिलताएं कई लोगों को भ्रमित कर सकती हैं.

उन्होंने आगे कहा, ''मैंने लंदन स्कूल ऑफ एकोनॉमिक्स से मास्टर्स डिग्री ली है उसके बावजूद मुझे इस मतपत्र की भाषा समझ नहीं आ रही. ऊपर से यह अंग्रेज़ी में है तो सोचिए गांव की महिलाएं इसे कैसे समझ पाएंगी.''

वहीं कुछ लोगों का मानना है कि अगर जल्द ही समझौते पर हस्ताक्षर नहीं होते हैं तो ग्रीस के पर्यटन उद्योग को काफी नुकसान पहुंचेगा.

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