अंतरिक्ष से पृथ्वी के रंग बिरंगे नज़ारे

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किसी भी अंतरित्र यात्री के काम में फ़ोटोग्राफ़ी भी शामिल होता है और अब तक इसके शानदार परिणाम देखने को मिले हैं.

अंतरिक्ष यात्रियों की ली गई तस्वीरों की मदद से हम पृथ्वी से हज़ारों मील दूर के रहस्यों को जानने में कामयाब हुए हैं.

वैसे अंतरिक्ष यान से तस्वीरें लेना बच्चों का खेल नहीं हैं. अंतरिक्ष यान अमूमन, बुलेट की स्पीड से तेज़ यानी पांच मील प्रति सेकेंड की रफ़्तार से घूम रहा होता है.

ऐसे में एकाग्रता और कौशल दिखाते हुए ज़्यादा से ज़्यादा तस्वीरें खींचना आसान नहीं होता है.

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अमरीका के डॉन पेटिट रासायनिक इंजीनियर हैं और नासा के अंतरिक्ष यात्री भी हैं. उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) से पृथ्वीं की कई तस्वीरें लीं हैं.

14 साल के नज़ारे

डॉन पेटिट ने पहली बार अंतरिक्ष यान इंडेवर के साथ 2002 में अंतरिक्ष की यात्रा की थी. अब तक वो अपने जीवन का कुल मिलाकर एक साल से भी अधिक समय इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) में बिता चुके हैं.

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उनकी खींची गई 12 लाख तस्वीरें 14 साल की अवधि के दौरान अंतरिक्ष में जुटाए गए वैज्ञानिक सबूतों के समान हैं.

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हाल ही में डॉन पेटिट के अंतरिक्ष में फोटोग्राफ़ी करने पर 'स्मगमग फ़िल्म्स' ने एक वीडियो जारी किया है.

डॉन ने किस अंदाज़ से अंतरिक्ष से पृथ्वी की घटनाओं की तस्वीरें ली हैं, ये नार्दन लाइट्स का तिलिस्म, सितारों की पगडंडी और रात में पृथ्वी के शहरों की रोशनी से ज़ाहिर होता है.

डॉन ने पृथ्वी के बाहरी वायुमंडल को भी अपने कैमरे में क़ैद किया है, जिसे वैज्ञानिक 'एयर ग्लो' कहते हैं और इसे पृथ्वी पर मनुष्यों के लिए आंख से देखना संभव नहीं हैं.

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डॉन कहते हैं, "अंतरिक्ष से अगर आप सही समय पर देखें तो हरे रंग की चमक काफी रोशनी भरी दिखती है."

तस्वीर लेना भी मुश्किल

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डॉन ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में अपनी मौजूदगी के दौरान पृथ्वी की तस्वीरों को लेने के बेहतर तरीके ढूंढ निकाले, इतना ही नहीं उन्होंने उन चीजों की भी अंतरिक्ष से पहचान की जिन्हें अंतरिक्ष से देखना संभव है.

इन जानकारियों को सेटेलाइट की प्रोग्रामिंग में इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि इनकी ज़्यादा तस्वीरें ली जा सकें. डॉन की तस्वीरों को दूसरे अंतरिक्ष यान से हासिल डाटा के साथ मिलाकर देखा जा सकता है और पृथ्वी से ली गई तस्वीरों की मदद से भी वैज्ञानिक अलग अलग घटनाओं की पड़ताल कर सकते हैं.

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डॉन के मुताबिक रात में पृथ्वी की तस्वीरों को खींचना उनका सबसे पसंदीदा विषय है.

डॉन कहते हैं, "नॉर्दन लाइट्स को देखना बेहद ख़ूबसूरत है. इसके अलावा रात में शहरों को देखना भी दिलचस्प होता है. शहरी क्षेत्रों में जिस तरह से सूर्य की चमकीली रोशनी देखने को मिलती है वह काफी कुछ दर्शाता है. इससे आपको काफी कुछ सीखने को मिलता है."

बुलेट से तेज़ रफ़्तार

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इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से फोटो लेना एक मुश्किल चुनौती है. आईएसएस में कुछ खिड़कियां ऐसी हैं जहां से तस्वीरें ली जा सकती हैं लेकिन ज़्यादातर जगहें तकनीकी उपकरण और सोलर पैनल के लिए इस्तेमाल होती हैं.

यहां पर कूपोला विंडो में इतनी जगह होती है कि उसमें छह से आठ कैमरे लगाए जा सकते हैं. अच्छी बात ये ज़रूर है कि उन्हें ट्रायपॉड की आवश्यकता नहीं पड़ती है.

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डॉन कहते हैं, "आप 8 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ़्तार से चल रहे होते हैं, जिसकी रफ़्तार बुलेट की रफ़्तार से भी तेज़ होती है. पृथ्वी की गति भी तेज़ होती है."

डॉन के मुताबिक अंतरिक्ष से पृथ्वी बेहद ख़ूबसूरत दिखाई देती है. डॉन कहते हैं, "आप एक बार में आधे महाद्वीप को देख सकते हैं."

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी अर्थ पर उपलब्ध है.

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