पृथ्वी के बर्फ़ीले कोने की जोख़िम भरी सैर

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कनाडा के नूनावूट में दूर तक फैली आर्कटिक टेरिटरी का विहंगम दृश्य देखने हर साल कुछ हफ़्तों के लिए पर्यटकों का तांता लगता है.

हर साल मध्य मई से जून के तीसरे सप्ताह के दौरान दुनिया भर के पर्यटक यहाँ पहुंचते हैं.

मीलों तक फैली बर्फ़़ की चादर दिखाई देती है, जो जमे हुए समुद्र से कब मिल जाती है, पता ही नहीं चलता.

यहां एडवेंचर के ख़ास शौकीन ही पहुंचते हैं और वो नायलन के बने पतले टैंटों में बर्फ़ की चादर पर ही टैंट गाढ़कर रात बिताते हैं.

ख़तरों भी कम नहीं

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यहाँ ध्रुवीय भालू, चक्राकार सील, पहाड़ी भेड़िए और आर्कटिक व्हेल (सामान्य व्हेल से छोटी) के खतरे मौजूद हैं.

लेकिन इन सबके बीच भी यहां आने का रोमांच कुछ ऐसा है कि लोग खिंचे हुए चले आते हैं.

जून में, कनाडा की एडवेंचर कंपनी ब्लैक फैदर की मदद से मैं इस इलाके में पहुंचा.

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हम कनाडा के उत्तरी छोर पर स्थित बाफ़िन द्वीप से नूनावूट के लिए रवाना हुए.

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बाफ़िन तक आप ओटवा और मांट्रियल से सात घंटे की फ़्लाइट लेकर पहुंच सकते हैं.

इस द्वीप के बंदरगाह का हाल देखिए, सब कुछ जमा हुआ. केवल गर्मियों में इसमें आवाजाही हो सकती है.

जून में तापमान थोड़ा ज्यादा होता है, शून्य डिग्री से थोड़ा ही ज्यादा.

आपको खुद को गर्म रखने वाले कपड़ों की जरूरत होती है और इस इलाके में आप लकड़ी से बनी ऐसी गाड़ियों में सफर कर सकते हैं जो बर्फ़ पर फिसलती हो.

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इस इलाके का स्थानीय समुदाय इनुइट कहलाता है और शिकार करना इस समुदाय की संस्कृति में शामिल है.

कैसे रहते हैं लोग?

ध्रुवीय भालू और आर्कटिक व्हेल के चमड़े और फर से जूते, जैकटे और लाइनिंग्स तैयार किए जाते हैं, जो आपको गर्म रखते हैं.

जब मैं पौंड इनलेट इलाके में पहुंचा तब कनाडा की आउटरवियर कंपनी कनाडा गूज़ इलाके में कपड़े और अन्य सामानों को वितरित करने के लिए पहुंची हुई थी.

उनके कपड़े और हाथ से बने जैकेट उपर की तस्वीरों में आप देख सकते हैं.

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इस तस्वीर में जमा हुआ समुद्र दिख रहा है. यहां अमूमन तीन मीटर की गहराई तक समुद्री पानी जमा होता है, लेकिन ऊपर के कुछ सेंटीमीटर का पानी पिघला हुआ भी था.

पौंड इनलेट से फ्लो एज तक का 60 किलोमीटर का सफर अमूमन तीन घंटे में पूरा होता है. इस सफर के बाद पर्यटक थोड़े समय तक आराम करते हैं, ताकि शरीर को गर्माहट मिले.

बर्फ़ पर फिसलने वाली गाड़ी को खिंचने वाले चालक सावधानी बरतते हैं, क्योंकि कई जगहों पर बर्फ़ में दरारें आ जाती हैं.

कितना है ख़तरा?

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हमारे गाइड स्टीव रस्की ने बताया, "बर्फ़ीले तूफान की वजह से बर्फ़ का स्तर बढ़ता है. क्रैक भी आ जाते हैं लेकिन वे हर साल एक ही जगह पड़ते हैं."

हमारे टैंट फ्लो एज पर लगाए गए थे, एकदम सीधी रेखा में. यह समुद्री तट से केवल 50 मीटर की दूरी पर स्थित था.

इसके आसपास से ध्रुवीय भालू गुजर सकते थे. टैंट में गर्माहट देने वाले स्लीपिंग बैग्स, खाने पीने की सुविधा, एयर मैट्रेस और छोटा सा टॉयलेट टैंट भी मौजूद था.

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पोलर सी एडवेंचर्स कंपनी के डेविड रीड कहते हैं, "यहां के वातावरण में एक तरह की अस्थिरता का भाव है. अगर दो बजे सुबह में पता चलता है कि बर्फ़ का टुकड़ा पिघल कर समुद्र में बहने लगा है तो आपको उसी वक्त यहां से निकलना होता है."

जून में नूनावूट में 24 घंटे सूर्य की रोशनी रहती है. ऐसी स्थिति में बर्फ़ और मौसम की स्थिति में बदलाव तेजी से होते हैं.

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रीड कहते हैं, "यहां आने का उद्देश्य एडवेंचर करना ही होता है और आप ये भी सोच रहे होते हैं कि आप दुनिया के एक कोने में है. 24 घंटे सूर्य की रोशनी के चलते बर्फ़ के टुकड़े गतिशील भी होते हैं."

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जब बर्फ़ पिघलने लगती है और उसमें दरार आ जाती है तो आपको ध्रुवीय जीव काफी ज्यादा नज़र आने लगते हैं. इनमें ध्रुवीय भालू, समुद्री सील और आर्कटिक व्हेल शामिल हैं.

हम पूरे समय तक फ्लो एज कैंप में ही रहे. जब हम भालूओं को देख रहे थे, तब ब्लैक फैदर कंपनी का एक सशस्त्र सुरक्षा गार्ड हमारे साथ था.

एडवेंचर भी, जोख़िम भी

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गाइड कोनो गोडार्ड ने कहा, "हम लोग ध्रुवीय भालू के क्षेत्र में हैं, इसलिए हमें हर पल सजग रहने की जरूरत है. किसी भी वक्त वे आपके शेल्टर या टैंट में घुस सकते हैं."

ऐसी स्थिति में लोग हवाई फ़ायरिंग करते हैं, आवाज़ सुनकर ध्रुवीय भालू इधर उधर भाग निकलते हैं.

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आर्कटिक क्षेत्र में पाए जाने वाली व्हेल का स्थानीय लोग शिकार भी ख़ूब करते हैं.

ये शिकारी तब व्हेल पर गोली चलाते हैं जब समुद्र में व्हेल का पूरा फेफड़ा हवा में होता है. इसके बाद उसे खींचकर बर्फ़ की सतह पर लाते हैं.

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स्थानीय समुदाय के लोग आर्कटिक व्हेल के केवल सिर का इस्तेमाल खाने के लिए करते हैं.

लेकिन बाकी हिस्सा भी बर्बाद नहीं होता. लोमड़ी, ध्रुवीय भालू और पहाड़ी कौवे सब चट कर जाते हैं.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी ट्रैवल पर उपलब्ध है.

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