बदबूदार जूतों से चीनी सेना को छुटकारा!

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चीनी सेना की पुलिस शाखा को पुराने हरे कैनवास 'लिबरेशन शू' से जल्दी ही निजात मिलने वाली है. इसकी जगह नए स्टाइल के काले ट्रेनर जूते लेंगे.

साल 1949 में देश में हुए गृहयुद्ध में कम्युनिस्टों की जीत के बाद से लिबरेशन शू यानी हरे कैनवास जूते चलन में आए थे.

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की वेबसाइट का कहना है कि 'क्रांति का वर्ष' देख चुके इन हरे जूतों के मुकाबले नए काले जूतों से कम गंध आएगी.

सैनिकों की ट्रेनिंग के दौरान पुराने कैनवास जूतों की जगह अब कॉम्बैट बूट्स का इस्तेमाल होने लगा है.

'हल्के और कम बदबूदार'

चीन के सार्वजनिक सुरक्षा ब्यूरो और पीएलए की अर्द्धसैनिक शाखा के करीब 180,000 सैनिकों और अधिकारियों से नए काले ट्रेनर जूतों पर राय मांगी गई.

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक जूते डिजाइन करने वाले सैन्य पुलिस अधिकारी जियांगडोंग ने काले ट्रेनर जूतों को 'बैक्टीरिया, फंगस और गंध प्रतिरोधी' बताया.

सैन्य पुलिस के सदस्य ली झिजियांग को भी नए जूते पसंद आए हैं. उन्होंने सेना की वेबसाइट पर टिप्पणी की है कि नए जूते हल्के हैं.

ली झिजियांग ने लिखा, "जबसे हमें नए जूते मिले हैं हमारे होस्टल को पैरों की गंदीवाली गंध से आजादी मिल गई है."

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दिखने में गहरे हरे रंग के परंपरागत हरे जूतों का इस्तेमाल पीएलए की यूनिट अब भी बड़े पैमाने पर कर रही है.

हालांकि ये वॉटर रेजिस्टेंट नहीं होने के कारण कम पसंद किए जाते हैं और इनकी हील भी इतनी नीची होती है कि रेत में पांव गंदे होने का खतरा बना रहता है.

मार्च में चीन ने कहा था कि वह डिफेंस के आधुनिकीकरण के लिए साल 2015 तक अपने सैन्य बजट में 10 प्रतिशत का इजाफा करेगा.

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