तालिबान में नेतृत्व को लेकर मतभेद

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अफ़ग़ान तालिबान के नेता मुल्ला उमर की मौत के बाद नए नेता के चयन पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

गुरुवार को ख़बर आई थी कि मुल्ला अख़्तर मंसूर को तालिबान का नेता चुना गया है.

लेकिन अफ़ग़ान तालिबान सुप्रीम काउंसिल के एक प्रवक्ता मुल्ला अब्दुल मनन नियाज़ी ने बीबीसी को बताया है कि नए नेता के चयन के लिए काउंसिल से परामर्श नहीं किया गया.

मुल्ला नियाज़ी ने कहा कि काउंसिल नया नेता चुनने के लिए चार-पांच दिनों में बैठक बुलाएगी.

इस बैठक में मुल्ला अख़्तर मंसूर को भी बुलाया जाएगा जिन्हें हाल ही में तालिबान का नया नेता चुना गया है.

संवाददाताओं के मुताबिक, प्रवक्ता की इन टिप्पणियों से साफ़ लगता है कि इस चरमपंथी गुट के भीतर मतभेद पैदा हो गए हैं.

हक़्क़ानी की मौत!

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तालिबान के कुछ सदस्यों ने पाकिस्तान समर्थक जमात पर इलज़ाम लगाया है कि वे मुल्ला मंसूर को उन पर जबरन थोप रहे हैं.

इस गुट का कम से कम एक वर्ग ये भी चाहता है कि मुल्ला उमर को तालिबान का नेता घोषित किया जाए.

उधर चरमपंथी हक़्क़ानी नेटवर्क के नेता जलालुद्दीन हक़्क़ानी की मौत को लेकर संशय बना हुआ है.

चरमपंथी संगठन तालिबान ने दावा किया है कि हक़्क़ानी की मौत की ख़बर बेबुनियाद है.

इससे पहले सूत्रों ने बीबीसी को बताया था कि चरमपंथी हक़्क़ानी नेटवर्क के अफ़ग़ान संस्थापक जलालुद्दीन हक़्क़ानी की कम से कम एक वर्ष पहले मौत हो गई थी.

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