'ऑल गर्ल्स क्लब' से मिलेगी मर्दों को चुनौती

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Image caption फ़ालेन फ़ातिमी नोड की सीईओ हैं

दुनिया भर में इन दिनों स्टार्ट अप की धूम है लेकिन समाज और उद्योग के कई और क्षेत्रों की तरह, दबदबा यहाँ भी पुरुषों का ही है.

विश्वविद्यालयों में इंडीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की बहुत ही कम संख्या के कारण तकनीकी और स्टार्ट अप का क्षेत्र 'ब्वायज़ क्लब' जैसा बन गया है.

एडिनबरा यूनिवर्सिटी के दो साल के अध्ययन में पाया गया कि इन कोर्सों में दाख़िला लेने वाली महिलाओं की संख्या या उसी स्तर पर अटकी हुई है या फिर गिर रही है. अमरीका में तो 1980 के दशक के मुकाबले कंप्यूटर साइस पढ़ने वाली लड़कियों की संख्या ख़ासी गिरी है.

महिलाओं के बारे में पुराने, रूढ़िवादी विचारों ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया.

सिलिकन वैली में विमेंस स्टार्टअप लैब की संस्थापक एरी होरई बताती हैं कि स्टार्ट अप इकोसिस्टम में ही नहीं, बल्कि अन्य कारोबारी जगत में भी सफलता का मॉडल जैसे पुरुषों के लिए ही बना हुआ है.

वो बताती हैं, "सफलता का मॉडल है- काम के ज़्यादा घंटे, नेटवर्किंग के लिए शाम को शराब पीने पिलाने का दौर, और गॉल्फ़ कोर्स में लंबी बातचीत के दौर से बनता विश्वास का रिश्ता....महिलाएं को ऐसे सफलता के मॉडल का नुकसान होता है क्योंकि वो इन रास्तों को नहीं अपना सकती हैं. लिहाजा महिलाएँ कामयाबी के दूसरा विकल्प अपना रही हैं."

इसीलिए इस क्षेत्र में बदलाव की बयार आ रही है.

ऐसा संभव हो रहा है 'ऑल गर्ल्स क्लब' के ज़रिए, यानी महिलाओं के वो ग्रुप्स और कंपनियां जिन्हें महिलाएँ चलाती हैं और जिनसे और महिलाओं को इस क्षेत्र में नए-नए अवसर मुहैया कराए जा रहे हैं.

महिलाओं की भागीदारी कम

फार्चून पत्रिकार के मुताबिक अमरीका में एक अरब डॉलर से ज़्यादा का कारोबार करने वाली यूनिकार्न कंपनियों के बोर्ड रूम में महज 6.2 प्रतिशत डायरेक्टर ही महिलाएं हैं.

बैबसन कॉलेज के एक अध्ययन के मुताबिक अमरीकी वेंचर कैपिटल फर्म्स में 2014 में महिला साझेदार महज़ 6 फ़ीसदी थी. यह संख्या 1999 में 10 फ़ीसदी से गिरी है.

अमरीकी के तकनीकी और स्टार्ट अप हब सिलिकन वैली में तकनीकी स्टार्टअप्स में कार्यकारी पदों पर केवल 11 प्रतिशत ही महिलाएँ हैं.

वैसे ये केवल अमरीका की तस्वीर नहीं है. 2012 में ऑस्ट्रेलिया में डिलॉइट फर्म के एक अध्ययन के मुताबिक 1000 तकनीकी स्टार्ट अप में केवल 4.3 प्रतिशत की संस्थापक सदस्य महिलाएं हैं.

इसराइल के सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ स्टैटिसटिक्स के मुताबिक तकनीकी कंपनियों के संस्थापकों में महिलाओं की संख्या 10 फ़ीसदी से कम है.

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Image caption फ़ेलेना हेनसन हेरा हब की संस्थापिका हैं

वैसे वायरा एक्सलरेटर्स के सर्वे के मुताबिक लंदन में तकनीकी कंपनियों के प्रमोटरों में 30.3 फ़ीसदी महिलाएं हैं.

क्या है 'गर्ल्स क्लब' की भूमिका?

तकनीकी स्टार्ट अप और कंपनियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के जो प्रयास हो रहे हैं. ऐसा जिन संस्थाओं और कंपनियों के ज़रिए हो रहा है, उन्हें 'ऑल गर्ल्स क्लब' कहा जा रहा है.

ये वो कंपनियां और स्टार्ट अप हैं जिन्हें महिलाएँ शुरू कर रही हैं. इनमें महिलाओं को ज्यादा काम मिल रहा है. इन कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने के लिए भी महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है.

हालांकि ऐसा नहीं है कि यहां पुरुषों का विरोध होता है, लेकिन महिलाओं द्वारा शुरू किए गए इन स्टार्ट अप में ऊपर से नीचे तक महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है. महिलाएँ भी एक दूसरे को मौके देकर और उनके बारे में बताकर इस प्रक्रिया को आगे बढा रही हैं.

कैसे चलता है गर्ल्स क्लब?

इस तरह का पहला महिलाओं का नेटवर्क (नॉन प्राफ़िट प्लेटफॉर्म) स्प्रिंग बोर्ड इंटरप्राइजेज था. इसके कार्यक्रम 2000 के दशक से अमरीकी शहरों में चल रह हैं. इन कार्यक्रमों में 500 से ज्यादा उद्यमी शामिल थे और इन्होंने 6.5 अरब डॉलर जुटाए थे. इसके बाद इसी संस्थान ऑस्ट्रेलिया में लाँच किया गया.

विमेंस स्टार्ट अप लैब भी महिलाओं के नेतृत्व वाले वेंचर के लिए काम करता है. होरी के मुताबिक इन नेटवर्क्स के उद्देश्यों हैं- ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को शामिल करें, केवल शीर्ष पर पहुंची हुई महिलाओं की ही मदद नहीं....

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इस कार्यक्रम में कंपनी की ग्रोथ के बारे में तैयारी की जाती है और उसे हासिल करने के लिए हरसंभव मदद दी जाती है. संभावित निवेशकों और बिज़नेस मेंटॉर के साथ उनकी मुलाकात सुनिश्चित की जाती है.

2004 में जेंडर मेडिसीन में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक कामकाजी माहौल में महिलाएं आपसी संबंध, सम्मान, समानता और सहयोग को ज्यादा महत्व देती हैं.

जबकि पुरुष वेतन, पैसा, सुविधाएं और पावर पर ज़्यादा ध्यान देते हैं.

सिंगापुर में ऐसा प्लेटफॉर्म है वूल्फ़ वर्क्स, जिसमें केवल महिलाएं काम कर रही हैं. यह वर्जीनिया वूल्फ़ की 'ए रूम ऑफ़ वन्स ओन' से प्रभावित है और इसकी शुरुआत 2014 में हुई थी.

इसी तरह का एक और प्लेटफॉर्म है 'शी विल शाइन एचक्यू हब.' यह मेलबर्न में स्थित है. इसकी शुरुआत 2014 में हुई थी. यह केवल महिलाओं वाले कारोबारी समूह को वर्कशाप मुहैया कराते हैं.

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2009 में स्थापित हेरा हब इसी तरह से अमरीका के सैन डियागो से लेकर वाशिंगटन डीसी तक में महिलाओं के साथ काम कर रहा है. यहां पुरुषों पर पाबंदी तो नहीं है, लेकिन फेलेना हेनसन ने इसे महिला प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए शुरू किया था.

हेनसन मानती हैं कि कामकाजी माहौल ऐसा होना चहिए जिसमें आगे बढ़ने के लिए आपको किसी दूसरे को धक्का देने की जरूरत नहीं हो. हेनसन कहती हैं, "महिलाएं एक दूसरे की मदद करती हैं. वह कहीं ज़्यादा बेहतर ढंग से नेटवर्किंग करने में कामयाब होती हैं."

दुनिया के कई देशों में पहुंच

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हेरा हब अब सऊदी अरब और दूसरी जगहों पर विस्तार की योजना बना रहा है. सऊदी अरब के संभावित साझेदारों ने हेनसन से कहा कि वहां पुरुषों और महिलाओं के बीच सामाजिक अलगाव के चलते महिलाओं के समूह में ही महिलाएं काम कर सकती हैं.

इसराइल के तेल अवीव में वीएमएन इसी तरह का वर्क हब है. मार्च 2015 में उद्यमी ओरेन मेराव ने इसे शुरु किया था. उन्होंने अपने वर्क हब के बारे में कहा, "हम महिला उद्यमियों के पास पहुंच रहे हैं. मैं महिलाओं के शुरु किए गए वेंचर पर ज़्यादा ध्यान दे रही हूं. हमारे वर्क स्पेस में महिलाओं और पुरुषों की भागीदारी 50-50 फीसदी है."

फोलोन फातेमी गूगल में सबसे कम उम्र की महिला कर्मचारी थीं. उन्हें महज 19 साल में गूगल की नौकरी मिल गई थी. उन्होंने नोड नाम से अपना स्टार्ट अप शुरू किया. इस स्टार्ट अप का उद्देश्य है कि उन महिलाओं को जोड़ा जाए जिन्हें जोड़ने की ज़रूरत है.

फातेमी मानती हैं कि महिलाओं को लेकर होने वाली पहल, लैंगिक मुद्दों पर जागरुकता और महिला उद्यमियों के लिए फंड की व्यवस्था करेगी. हालांकि वे इस दौरान 'अस वर्सेज दैम' यानी पुरुष बनाम महिला की मानसिकता से बचने की सलाह भी देती हैं.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

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