बीवी को सियासत से क्यों दूर रखना चाहते इमरान

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"पीटीआई सभी प्रकार की वंशवादी राजनीति के ख़िलाफ़ है. रेहाम पार्टी में कोई पद नहीं लेंगी. ख़ैबर पख्तूनख्वा में कोई पद नहीं लेंगी और उन्हें कोई सरकारी प्रोटोकॉल नहीं दिया जाएगा. रेहाम पीटीआई के टिकट पर चुनाव भी नहीं लड़ेंगी."

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी (पीटीआई) के अध्यक्ष और पूर्व क्रिकेटर इमरान ख़ान की पत्नी और टीवी एंकर रेहाम ख़ान के राजनीतिक भविष्य के बारे में फैसला आज इमरान ख़ान के ट्विटर खाते से जारी हुआ.

लेकिन क्यों?

शादी के बाद से रेहाम ख़ान पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के विभिन्न कार्यक्रमों का स्वाभाविक तौर पर हिस्सा बन चुकी थीं.

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लेकिन हाल ही में हरिपुर संसदीय सीट पर पीटीआई की पाकिस्तान मुस्लिम लीग के हाथों भारी पराजय के बाद विभिन्न हलकों, विशेषकर पीटीआई के समर्थकों की ओर से रेहाम ख़ान की भारी आलोचना की जा रही थी और उन पर पार्टी के मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया जा रहा था.

इसके अलावा सरकारी प्रोटोकॉल का उपयोग करने के लिए भी गाहे-बगाहे रेहाम ख़ान की आलोचना की जा रही थी.

उदाहरण के रूप में इंतख़ाब आमिर ने अपने ट्वीट में लिखा, "पीटीआई हरिपुर में हार गई. क्या यह रेहाम ख़ान के राजनीतिक करियर के उड़ान भर पाने से पहले ही उनकी राजनीतिक अपील को ख़ारिज किया जाना नहीं है?"

आमना ख़ान ने लिखा, "मान लीजिए कि इमरान ख़ान ने भी ग़लती की. क्यों रेहाम ख़ान को हरिपुर चुनाव प्रचार के लिए जाने दिया? यह पीटीआई के सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है. उन्हें समझना ही चाहिए."

सलमान बशीर ने लिखा कि "हरिपुर में रेहाम ख़ान के शो से काम नहीं चला. समझ जाना चाहिए कि यह राजनीति है, टीवी शो नहीं."

वंशवाद को बढ़ावा

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इस प्रकार कई ट्वीट में पीटीआई और इमरान ख़ान पर वंशवादी राजनीति को बढ़ावा देने के आरोप भी लगाए गए.

डॉन पत्रिका के संपादक ज़रार खोड़ो ने इस पर कहा, "यह केवल हरिपुर की प्रतिक्रिया नहीं थी, यह उस बात पर भी हमला था जो वंशवादी राजनीति के हवाले से रेहाम ख़ान की राजनीतिक व्यस्तता के रूप में सामने आई थी."

ज़रार ने कहा कि इसका दूसरा पहलू यह है कि यह ख़ासतौर पर पीटीआई बलि की बकरा बनाने वाली नीति है. आप अपनी नीतियों की वजह से लगातार उपचुनाव हारे हैं मगर इसे स्वीकार करना मुश्किल काम है.

ऐसे में आसान काम यही है कि आप पूरा मलबा एक व्यक्ति पर डाल दें. और लगता यहाँ यही हुआ है.

राजनीति से छुट्टी

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इस आलोचना का जवाब देते हुए इमरान ख़ान ने अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से कहा, "मुझे हरिपुर उपचुनाव के बाद रेहाम ख़ान आलोचना से बहुत दुख हुआ है. रेहाम वहां केवल उम्मीदवार के तीव्र आग्रह पर चुनाव प्रचार में भाग लेने के लिए गई थीं."

उन्होंने लिखा कि "यह बात स्पष्ट कर दूं कि रेहाम पीटीआई कार्यक्रमों में शामिल सिर्फ़ पार्टी कार्यकर्ताओं के और ख़ासकर महिला कार्यकर्ताओं के निरंतर आग्रह पर ही हुई थीं."

पार्टी में अपनी पत्नी के राजनीतिक भविष्य पर फैसला करते हुए इमरान ख़ान ने यहां तक कह दिया कि भविष्य में वह पार्टी के किसी कार्यक्रम में भाग नहीं लेगी.

इमरान ने लिखा, "रेहाम ख़ान के पास बहुत सारा काम है, ख़ासकर बेघर बच्चों के लिए. भविष्य में वह पीटीआई के किसी भी कार्यक्रम में शिरकत नहीं करेंगी."

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इसके जवाब में रेहाम ख़ान ने कहा, "मेरा और ख़ान का एक ही उद्देश्य है - पाकिस्तान का विकास. वह इसके लिए अपनी राजनीतिक पार्टी चलाते हैं और मैं स्वेच्छा से बच्चों की शिक्षा के लिए काम करती हूं. मैंने पीटीआई के उद्देश्य का समर्थन इसलिए किया क्योंकि इसके लिए मेरे पति ने अपना जीवन समर्पित किया है."

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