चोरी की मिठाई क्यों ज़्यादा भाती है?

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अपराध बोध हो तो कुछ काम अधिक आकर्षक लगने लगते हैं. यदि ये सही है तो क्या छोटा-मोटा पाप कर लेने से हम अधिक खुश और सेहतमंद होंगे?

ये व्यक्तिगत अनुभव से निकला तथ्य नहीं है, बल्कि मैं विशेषज्ञों की राय को आधार बना रहा हूँ. हमारी बहुत सी चिंताएं होती हैं, जो हमारे बूते से बाहर होती हैं. फिर भी, इन चीजों का बुरा माने बिना हमें इनका आनंद उठाना चाहिए.

लेकिन, मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि कुछेक मामलों को छोड़ दिया जाए तो खाने या जीवनशैली के बारे में तो ये सही नहीं लगता है.

खाने और जीवनशैली के बारे में तो हमारा अपराध बोध हमें स्वस्थ रहने में मददगार साबित होता नहीं दिखता.

अपराध बोध से खुशी

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इसकी कई वजहें हो सकती हैं. एक विचार यह है कि खुशी का अपराध बोध हमारे दिमाग़ में इस कदर बैठ चुका होता है कि पाप और पश्चाताप की भावना वास्तव में मन में विचारों का ट्रिगर बनकर रह जाती है.

दूसरे शब्दों में, हमारे पाप आंशिक तौर पर लुभावने होते हैं, क्योंकि हम जानते हैं कि वे हमारे लिए बुरे हैं.

नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी की कैली गोल्डस्मिथ ने इसके लिए कुछ प्रयोग किए. पहले कुछ लोगों को पाप और अपराध से जुड़े कुछ वाक्यों को सुलझाने के लिए कहा गया.

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दूसरे हिस्से में उन्हें कुछ शब्दों के शुरुआती अक्षर दिए गए और शब्द पूरे करने को कहा गया. इन अक्षरों को एन्जॉय और प्लेज़र जैसे शब्दों से पूरा किया गया.

कहने का मतलब कि पाप और अपराध से ध्यान हटाने के बजाय उन लोगों ने और आनंदपूर्वक सोचना शुरू कर दिया.

क्या है सोच?

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लेकिन अपराध बोध में ये घुमाव यहीं नहीं रुकता. एक अन्य अध्ययन के मुताबिक़ अधिकतर लोग ये सोचते हैं कि अगर वे एक बार विफल हो गए तो उसे पूरी तरह से छोड़ देंगे.

न्यूज़ीलैंड स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ़ केंटरबरी की रुलीन कुजेर और जेसिका बोएस ने लोगों की खाने की आदतों का अध्ययन किया.

उन्होंने पाया कि जो लोग स्वाभाविक तौर पर अपराध बोध के साथ चॉकलेट, केक आदि खाते हैं, वे इन चीज़ों को समारोह की तरह मनाते हैं.

गोल्डस्मिथ कहती हैं कि ये अध्ययन हमारे चरित्र में आई गिरावट को नहीं बताते.

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अगर हम किसी को ठेस पहुंचाते हैं तो हमें बहुत अलग महसूस होता है- मसलन, अगर हम अपनी दादी मां को किसी समारोह में जाने से रोकते हैं, तो हमें उस स्थिति से ज़्यादा अपराधबोध होता है, जबकि हम खुद किसी वजह से वहाँ नहीं जाते.

इस पूरी बहस में एक बात की अनदेखी हुई है और वह ये कि किसी चीज में लिप्त होना ठीक है और आनंद के साथ लिप्त होना बहुत अच्छा.

गोल्डस्मिथ कहती हैं, "अगर आप अधिकतर समय अच्छी चीजें खा रहे हैं, तो आपको आइसक्रीम खाने को लेकर अपराध बोध पालने की ज़रूरत नहीं है. आइसक्रीम का आनंद उठाइए. बस आनंद."

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ़्यूचर उपलब्ध है.

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