चीन के डर से गिरे दुनिया भर के बाज़ार

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चीनी अर्थव्यवस्था में सुस्ती का डर निवेशकों में घर कर गया है जिसकी वजह से अमरीका और यूरोप के स्टॉक मार्केट में सोमवार को भारी गिरावट हुई.

वॉल स्ट्रीट का डाउ जोंस सुबह की ट्रेडिंग के दौरान 2% तक गिरा. यह पहले 6% तक गिर चुका था.

लंदन का एफ़टीएसई 100 इंडेक्स दोपहर बाद की ट्रेडिंग में 3.9% नीचे था और फ़्रांस तथा जर्मनी के मुख्य बाज़ार क्रमशः 4.6% और 3.8% फ़ीसदी गिरे थे.

न्यूयॉर्क में लगभग हर क्षेत्र के स्टॉक को बिकवाली झेलनी पड़ी.

'लुढ़क रहे हैं'

एक समय तो डाउ जोंस 16,000 अंक तक गिरा जो फ़रवरी, 2014 के बाद पहली बार हुआ.

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जबकि टेक्नोलॉजी की प्रमुखता वाला नेसडेक इंडेक्स सुबह की ट्रेडिंग में 2.4% तक चल रहा था, जो इसके पहली ली गई 5% की डुबकी के मुकाबले बेहतर स्थिति थी.

एशिया में शेयर बाज़ार रातोंरात ढह गए. चीन में शंघाई कॉम्पोज़िट 8.5% गिरकर बंद हुआ जो वर्ष 2007 के बाद सबसे ख़राब स्थिति थी.

एफ़टीएसई 100 दिन में सबसे ख़राब स्थिति में 6% तक गिर गया था जिससे करीब 100 बिलियन पौंड (105.35 ख़रब रुपये से ज़्यादा) साफ़ हो गए.

दुनियाभर के निवेशक विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को लेकर चिंतित हैं.

चीन के केंद्रीय बैंक ने दो हफ़्ते पहले देश की मुद्रा, युआन का अवमूल्यन कर दिया था. इससे यह डर पैदा हुआ कि जितना डर था चीन में, आर्थिक सुस्ती उससे ज़्यादा है.

मुद्रा और कमोडिटी भी तेजी से गिर रही हैं क्योंकि इनके बाज़ार चीन की भारी मांग पर निर्भर हैं.

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विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के अधिकारियों की ओर से मजबूत आश्वासन के अभाव में निवेशकों को खरीदारी करने की कोई अच्छी वजह नहीं मिल रही. पिछली गर्मी में शुरू हुई बिकवाली ने अब रफ़्तार पकड़ ली है.

आईजी में बाज़ार विश्लेषक डेविड मैडेन कहते हैं, "ऐसा लगता है कि हम तेज़ी से नीचे की ओर लुढ़क रहे हैं."

'और अनिश्चितता'

एशिया में तेजी से गिरावट के निवेशकों के व्यापक डर को यूरोप में बेहद कमज़ोर ट्रेडिंग ने और बढ़ा दिया और बहुत से निवेशक बाज़ार से दूर ही रहे.

मैडेन कहते हैं, "मुझे लगता है कि आगे और अनिश्चितता है."

अच्छे सौदे की तलाश करने वालों के बाज़ार में आकर स्टॉक की कीमत बढ़ाए जाने तक निवेशकों को कई हफ़्तों तक इंतज़ार करना होगा.

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चीन के मुख्य सरकारी पेंशन फंड को स्टॉक मार्केट में लगाने के ताज़ा फ़ैसले से भी चीन में और बाहर ट्रेडर्स का डर कम नहीं हुआ.

पिछले कुछ हफ़्तों में शंघाई इंडेक्स 12% गिरा है जो जून के मध्य से कुल मिलाकर 30% हो गया है.

इस तेज गिरावट से वैश्विक गिरावट का दौर शुरू हो गया जिससे अमरीका में डाउ जोन्स को 6% और एफ़टीएसई 100 को 5% का झटका लगा, जो इस साल का सबसे बड़ा साप्ताहिक नुक़सान है.

इससे पहले इसी महीने चीन के केंद्रीय बैंक ने निर्यात बढ़ाने के लिए मुद्रा, युआन, का अवमूल्यन कर दिया था.

यूरोपीय निवेशकों को डर है कि सस्ती चीनी मुद्रा यूरोपीय निर्यात को प्रतियोगिता में पछाड़ देगी.

अन्य परिणाम

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यूरो के मुकाबले पौंड तेजी से गिरा. यह छह साल में अकेली मुद्रा के सामने एक दिन में हुई सबसे बड़ी गिरावट है.

ग्रीस के स्टॉक्स तेजी से गिरे. एथेन्स में बेंचमार्क एक्सचेंज 10% से भी नीचे चला गया.

दक्षिण अफ़्रीका की मुद्रा अमरीकी डॉलर के मुकाबले आज तक के सबसे न्यूनतम स्तर तक पहुंच गई.

इसके अलावा चीन से मांग में कमी होने की आशंका के चलते तेल की कीमतें भी छह साल से न्यूनतम स्तर पर पहुंच गईं.

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तेल की कम कीमतें और चीन की चिताओं ने रूस के रूबल की मुश्किलें बढ़ा दी हैं जो डॉलर के मुकाबले 70.92 पर चल रहा है. दिसंबर 2014 के बाद से यह सबसे कमज़ोर स्थिति में है.

भारत का बेंचमार्क बीएसई इंडेक्स सोमवार को 6% तक गिरा जो जनवरी 2009 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है.

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