पूर्व पाक पीएम गिलानी की गिरफ़्तारी का वारंट

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पाकिस्तान की एक अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी के खिलाफ गिरफ़्तारी का वारंट जारी किया है.

कोर्ट ने गिलानी के ख़िलाफ़ वारंट भ्रष्टाचार से जुड़े 12 मामलों को लेकर जारी किया है.

कोर्ट ने पूर्व मंत्री मख़दूम अमीन फहीम के ख़िलाफ़ भी वारंट जारी किया है.

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने गिलानी और फहीम पर लगाए गए आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है.

पेशी का आदेश

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कोर्ट ने मामले की जांच करने वाली फेडरल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एफआईए) को आदेश दिया है कि वो गिलानी और फहीम को 10 सितंबर को कोर्ट के सामने पेश करे.

एफआईए के अधिकारी ने बताया, "कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी का वारंट जारी किया है और उन्हें अगली सुनवाई पर पेश करने को कहा है. "

कोर्ट ने गिलानी और फहीम की गिरफ्तारी का वारंट उन पर लगाए गए भ्रष्टाचार के 12 नए मामलों में उनके कोर्ट में पेश न होने के बाद जारी किया.

ये दोनों भ्रष्टाचार से जुड़े 12 पुराने मामलों में जमानत पर हैं. इनके खिलाफ अब भ्रष्टाचार के कुल 24 मामले दर्ज हो गए हैं.

दोनों पर सत्ता में रहने के दौरान लाखों डॉलर रिश्वत लेने का आरोप है.

गिलानी 2008 से 2012 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे थे.

'राजनीति से प्रेरित कार्रवाई'

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गिलानी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के वाइस चेयरमैन हैं.

पार्टी की सीनेटर शेरी रहमान ने कहा कि ऐसा लगता है कि पार्टी नेताओं के ख़िलाफ़ बदले की कार्रवाई की जा रही है.

गिलानी सुनवाई के पहले गिरफ़्तारी से बचने के लिए ऊंची अदालत में जमानत के लिए अपील कर सकते हैं लेकिन फहीम का पेश होना मुश्किल है. वो फिलहाल ब्रिटेन में कैंसर का उपचार करा रहे हैं.

उधर रॉयटर्स के अनुसार पीपीपी के अन्य प्रमुख नेता असीम हुसैन को चरमपंथी रोधी कोर्ट ने 90 दिन तक हिरासत में रखने का आदेश दिया है. वो गुरुवार को कोर्ट के सामने पेश हुए थे.

पीपीपी सरकार में पेट्रोलियम मंत्री रहे असीम हुसैन पर चरमपंथ और हिंसा के लिए धन मुहैया कराने, चरमपंथ को मदद करने के लिए फंड की हेराफेरी और दूसरी आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं.

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