'पाकिस्तान सेना कर रही है सिस्टम की धुलाई'

पाकिस्तानी सेना के जवान इमेज कॉपीरइट EPA

पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में लगभग दो साल पहले जब भत्ताख़ोरी, भ्रष्टाचार, स्ट्रीट क्राइम, लैंड माफ़िया और चरमपंथ के ख़िलाफ़ अर्ध सैनिक बल, रेंजर्स और पुलिस का ऑपरेशन शुरू हुआ तो सब भत्ताख़ोरों, भ्रष्टचारियों, स्ट्रीट क्रिमिनलों, लैंड माफ़ियाओं और चरमपंथियों ने इसकी सराहना की, क्यूंकि सब जानते थे कि पहले भी सरकार ऐसे कच्चे-पक्के ड्रामे करती रही है और थक हारकर बैठकर गई. इस बार भी यही होगा इसलिए ज़रा देर को हम लोग भी छुट्टी मनाकर थोड़ा आराम-वाराम कर लेते हैं.

मगर इस बार ऐसा नहीं हुआ, रेंजर्स और इंटेलिजेंस एजेंसियों ने पहले की तरह सबपर एक साथ हाथ डालने की ग़लती नहीं कि बल्कि पहले सड़क छाप अपराधियों की ख़बर ली उसके बाद भत्ताख़ोरों की तरफ़ मुड़ी, फिर बाएँ को टर्न लेकर लैंड माफ़िया के पीछे दौड़ पड़ी और फिर अचानक दाएँ हाथ को यू-टर्न लेते हुए भ्रष्टाचारियों के पीछे भाग पड़ी.

जबकि चरमपंथियों के साथ भी अब तक छप्पन वाली फ़िल्म चल रही है.

छुपते फिर रहे हैं

इमेज कॉपीरइट AFP

जिन-जिन पर हाथ पड़ता जा रहा है, वो ऑपरेशन की सराहना छोड़ इधर उधर छुपते फिर रहे हैं. जिनके कनेक्शन हैं वो दुबई या लंदन की टिकट कटा रहे हैं.

जो पीछे रह गए वो गिरफ़्तारी से पहले ज़मानत के लिए कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगा रहे हैं.

हालत ये है कि सिर्फ़ सिंध प्रांत में चीफ़ सेक्रेटरी, मौजूदा और पूर्व मंत्रियों से लेकर निचले अफ़सरों तक क़रीब 83 लोगों ने पकड़-धकड़ से बचने के लिए ज़मानत करवा ली है और बाक़ी जज ढूंढते फिर रहे हैं.

सबसे पहले एमक्यूएम

राजनीतिक गुटों में सबसे पहले अल्ताफ़ हुसैन की एमक्यूएम की बारी आई तो नवाज़ शरीफ़ की मुस्लिम लीग और आसिफ़ ज़रदारी की पीपल्स पार्टी ख़ुश हो गए. जब आसिफ़ ज़रदारी के यार-दोस्तों के गले पर हाथ पड़ा तो नवाज़ शरीफ़ वाले भी एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि अगला कौन?

रह गए इमरान ख़ान तो वो पिछले चुनाव के बाद से आज तक ट्रक की बत्ती के पीछे दौड़ रहे हैं, उनकी बला से किसके साथ क्या हो रहा है.

लेकिन वाक़ई ये हो क्या रहा है?

पाकिस्तानी संसद में बैठी जिन पार्टियों ने चरमपंथ से निपटने का पूरा अधिकार सेना को दिया वही आज एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि भइया, हमने तो सेना को चरमपंथ से निपटने का अधिकार दिया था मगर ये तो भ्रष्टाचार को भी चरमपंथ समझ बैठी है.

सेना का कहना है कि चरमपंथ फैला ही इसलिए कि पूरा सिस्टम भ्रष्ट और जब तक धुलाई नहीं होगी तब तक ख़ून के धब्बे कैसे धुलेंगे?

कछार में शेर

इमेज कॉपीरइट AFP

अब हालत ये है कि नवाज़ शरीफ़ जिनका चुनाव चिह्न शेर था वो तो कछार में जा बैठा और कछार के बाहर असली वाला शेर घूम रहा है.

यही हाल सिंध प्रांत में हुकूमत करने वाली पीपल्स पार्टी का भी है. मुख्यमंत्री क़ायम अली शाह का चीख़ चीख़ कर गला बैठ गया कि कराची ऑपरेशन का कप्तान मैं हूँ.

मगर रेंजर्स वाले कहते हैं कि आप ही कप्तान हैं श्रीमान लेकिन ज़रा पीछे हटकर बैठिए हमें अपना काम करने दीजिए.

सिस्टम की धुलाई

इमेज कॉपीरइट AFP

कुछ लोग कहते हैं कि ये तो बहुत ही अच्छा है कि इस बार सेना सत्ता छीने बग़ैर सिविलियन को आगे करके सिस्टम की धुलाई कर रही है.

मगर पंडित लोग कहते हैं कि अगर पूरा जंगल भी सीधा हो जाए तब भी शेर से कौन पूछताछ करेगा और कौन कहेगा कि महाराज आपका काम अब पूरा हुआ, अब आप पिंजरे में जाकर थोड़ा सा आराम कर लें.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार