'मुसलमान शरणार्थियों से यूरोप को ख़तरा'

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हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने चेतावनी दी है कि यूरोप में बड़ी संख्या में मुसलमान शरणार्थियों के आने से यूरोप के ईसाई चरित्र को ख़तरा है.

हांलाकि उनके इस दावे को जर्मनी ने अस्वीकार कर दिया है.

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार ब्रसेल्स में संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि 'हम अपने देश में बड़ी संख्या में मुसलमान नहीं चाहते.'

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फ्रांसीसी समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार गुरुवार को हंगरी के प्रधानमंत्री ने यूरोप में जर्मनी के एक अखबार में लिखा है कि अगर संख्या में और वृद्धि होगी तो वो प्रवासियों को स्वीकार नहीं कर सकते. उन्होंने लिखा कि उनमें से अधिकांश ईसाई नहीं बल्कि मुसलमान हैं. उन्होंने यूरोपीय शरणार्थियों से जुड़ी नीति को भी 'असफल' करार दिया. उन्होंने लिखा, 'हमें यह बिल्कुल नहीं भूलना चाहिए कि जो लोग यहां आ रहे हैं वे एक अलग धर्म के प्रभाव में पले-बढ़े हैं और एक अलग संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं.'

शरणर्थियों के संकट के समाधान के लिए यूरोपीय संघ के गृह मंत्रियों की बैठक 14 सितंबर को ब्रसेल्स में होगी.

एएफ़पी के अनुसार जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने स्विट्जरलैंड के शहर बर्न में कहा कि 'कुछ हद तक हमारे मन में ईसाई मूल्य हैं लेकिन मानवता अधिक महत्वपूर्ण है'.

हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट के एक रेलवे स्टेशन पर हज़ारों फंसे प्रवासियों के मुद्दे पर बात करने के लिए हंगरी के प्रधानमंत्री और यूरोपीय संघ के अधिकारियों ब्रसल्स में बैठक कर रहे हैं.

इस दौरान हंगरी के प्रधानमंत्री का यह भी कहना था कि प्रवासियों की समस्या वास्तव में 'जर्मनी की समस्या' है क्योंकि यूरोपीय संघ में आने वाले सभी प्रवासी वहाँ ही जाना चाहते हैं'.

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जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल और फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलां ने कहा है कि शरणार्थियों को यूरोपीय संघ के देशों में समान रूप से बांटा जाएगा.

जर्मनी शरणार्थियों की बड़ी संख्या को स्वीकार करने के लिए तैयार है लेकिन दूसरे देश इस के लिए तैयार नहीं.

इससे पहले हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने गुरुवार को एक संवाददाता सम्मेलन में यह भी कहा कि हंगरी बिना पंजीकरण के किसी भी प्रवासी को अपने देश से नहीं निकलने देगा.

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यूरोपीय संसद के अध्यक्ष मार्टिन सेशेल्स के साथ एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान हंगरी के नेता ने कहा कि कोई भी हंगरी, स्लोवेनिया, पोलैंड या एस्टोनिया में नहीं रहना चाहता.'सब जर्मनी जाना चाहते हैं. हमारा काम इन्हें पंजीकृत करना है.'

केवल जुलाई में यूरोप में प्रवेश करने वाले शरणार्थियों की संख्या एक लाख सात हजार तक पहुँच गई है.

गौरतलब है कि केवल जुलाई में यूरोप में प्रवेश करने वाले शरणार्थियों की संख्या एक लाख सात हजार तक पहुंच गई है जो एक रिकॉर्ड है। जर्मनी का अनुमान है कि इस साल उसके यहां आठ लाख शरणार्थी पहुंचेंगे जो पिछले साल से चार गुना अधिक है.

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