चींटियां ख़ुद अपना इलाज कैसे करती हैं?

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कुछ ऐसी चींटियां हैं जो अपना इलाज़ ख़ुद करती हैं. जब वे संक्रमण महसूस करती हैं तो ख़ुद ही दवा की उचित डोज़ ले लेती हैं.

हाँ, ऐसा नहीं होता कि ये दवा उन्हें साफ़ सुथरी केमिस्ट शॉप से मिले.

दरअसल संक्रमित होने के बाद चींटियां सड़े हुए जानवरों के अवशेषों या पौधों पर मौजूद कीड़ों को खाती है.

ये चींटियां यानी फोरमिका फूस्का ज़मीन या फिर पहाड़ी के अंदर रहती हैं. उनके आस पड़ोस में ख़ासा ख़तरनाक फंगस मौजूद होता है जिससे चींटियां भी संक्रमित हो जाती हैं.

इन फंगस से ऐसी एंजाइमस निकलती हैं जो धीरे धीरे कर चींटियों के शरीर के जूस को खाने लगती हैं और यदि ये चलता रहे तो 10 दिनों में चींटी की मौत हो सकती है.

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अब तक ये माना जाता था कि संक्रमित चींटियां ख़ुद को असहाय पाती हैं, लेकिन हाल के एक अध्ययन के मुताबिक़ ऐसा नहीं है.

गंध से पहचान

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फिनलैंड की 'यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी' में निक बोस और उनके साथियों ने अपने अध्ययन में पाया कि जब चींटियां संक्रमित होती हैं तो वो अपना इलाज ख़ुद ही कर लेती हैं.

प्रयोगशाला में ये देखा गया कि फंगस से संक्रमित होने के बाद चींटियां सड़-गल रही चीज़ों, पौधों या फिर ऐसे ही 'हानिकारक' पदार्थों को खाती हैं, जो उनके शरीर में मौजूद फंगस को ख़त्म कर देता है और चींटियों की जीवनरक्षा करता है.

चींटियां ऐसे हानिकारक भोजन को गंध से पहचान लेती हैं और बोस के मुताबिक इसमें अचरज की कोई बात नहीं है.

वे कहते हैं, "उनमें गंध पहचानने की अद्भुत क्षमता होती है. वे अलग अलग पदार्थों को उनकी गंध से पहचानती हैं."

इस तरह से स्व उपचार की प्रक्रिया दूसरे जीवों में भी देखी गई है. यह पक्षियों, छिपकलियों और मधुमक्खियों में भी देखा गया है. ऐसा देखा गया है कि ये सब भी संक्रमित होने पर हानिकारक पदार्थों को खाकर संक्रमण को ख़त्म करने की कोशिश करते हैं.

शोध से पता चला

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दरअसल चींटियां रिएक्टिव ऑक्सीज़न स्पीसिज़ (आरओएस) की मदद से ऐसा करती हैं. आरओएस के कणों में ऑक्सीज़न होता है जो किसी भी संक्रमण को ख़त्म कर सकता है. कुछ जीवों में ये ख़ुद से उत्पन्न होता है जबकि कुछ इसे अपने भोजन से हासिल करते हैं.

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इसकी पड़ताल के लिए बोस और उनके साथियों ने चींटियों को दो समूह में बांट दिया और उनमें कुछ संक्रमण की शिकार चींटियां थीं. कुछ चींटियां सामान्य शहद वाला भोजन लेती हैं लेकिन जबकि चार फ़ीसदी हाइड्रोजन पेरॉक्साइड (एच2ओ2) वाला भोजन खा रही थीं, जिनमें आरओएस मौजूद है.

हालांकि इसमें ख़तरे भी हैं. एच2ओ2 ज़हरीला होता है इसलिए काफ़ी हानिकारक हो सकता है. गैर संक्रमित चींटियां हाइड्रोज़न पेरॉक्साइड का भोजन कर लें तो उनकी मौत भी हो सकती है.

चींटियों का संयम

ग़ौरतलब है कि संक्रमित चींटियों एच2ओ2 वाले भोजन की ओर गईं और उन्होंने ख़ुद के इलाज के लिए उसे प्राथमिकता दी.

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इतना ही नहीं, चींटियों को एच2ओ2 के ख़तरे का भी एहसास होता है, लिहाज़ा जब उन्हें ऐसे भोजन के दो विकल्प दिए गए तो उन्होंने न्यूनतम एच2ओ2 वाला खाना खाया जिससे दवा की उतनी ही ख़ुराक उनमें गई जिसकी ज़रूरत थी, ज़्यादा एच2ओ3 वाला भोजन उन्होंने नहीं खाया.

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अमरीका के अटलांटा स्थित एमरी यूनिवर्सिटी के जैकोबस डि रूड कहते हैं, "यह ठीक वैसा ही जैसे हम स्ट्रांग और लाइट बीयर के अंतर को जानते हैं और उसके मुताबिक ही उसका सेवन करते हैं."

स्वीडन के लुंड यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता जेसिका एबट मानती हैं, "यह देखना दिलचस्प है कि चींटियों को हाइड्रोजन पेरॉक्साइड की उचित मात्रा का अंदाजा होता है. लेकिन जीवों में यह गुण होता है और उन्हें अपने आंतरिक शरीर के बारे में बखूबी पता होता है."

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी अर्थ पर उपलब्ध है.

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