ऑस्ट्रिया और जर्मनी ने प्रवासियों का किया स्वागत

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हंगरी और जर्मनी दोनों देशों का कहना है कि हाल में ही प्रवासियों की समस्या से निपटने के लिए जो कदम उठाए गए वो इस समस्या का दीर्घकालिक निदान नहीं है,बल्कि एक अस्थाई हल है.

इसे आगे के लिए कोई मिसाल ना समझा जाए.

चांसलर एंगला मर्केल के एक प्रवक्ता ने कहा कि भविष्य में दोनों देश प्रवासियों को लेकर यूरोपीय संघ के नियमों का पालन करेंगे जिनके तहत जिस देश में शरणार्थी सबसे पहले पहुंचता है वहीं उसे शरण लेने के लिए अर्ज़ी देना ज़रूरी होता है.

फिलहाल संकट टला

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ऑस्ट्रिया और जर्मनी ने हज़ारों प्रवासियों को हंगरी में एक दिन फंसे रहने के बाद अपने देश आने की इजाज़त दे दी है.

ऑस्ट्रियाई सीमा पर स्वयंसेवकों ने इन प्रवासियों का स्वागत किया और उसके बाद उनमें से कई प्रवासी वहां से सीधे या तो विएना के लिए रवाना हो गए या फिर जर्मनी में म्यूनिख के लिए.

प्रवासियों की दुर्दशा से ये भी ज़ाहिर हुआ कि यूरोप किस कदर इन शरणार्थियों के लगातार आने की समस्या से जूझ रहा है.

हंगरी में जब इन प्रवासियों को यूरोप में आगे यात्रा करने से रोका गया तो राजधानी बुडापेस्ट में अव्यवस्था फैल गई.

हंगरी पर दबाब

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Image caption हंगरी में प्रवासियों को ऑस्ट्रिया की सामा पर छोड़ने के लिए बसें चलाई गईं

प्रवासियों की ज़िद थी कि वे हंगरी के शरणार्थी शिविरों में रहने की बजाए जर्मनी और ऑस्ट्रिया की तरफ जाएंगे

जब प्रवासियों की भीड़ हंगरी की पुलिस के मनाए भी ना रुकी और उसने पैदल ही ऑस्ट्रिया की तरफ जाने का निश्चय कर लिया तो हंगरी को ऑस्ट्रिया से लगी अपनी सीमा को खोलना पड़ा.

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शनिवार को हंगरी ने ना केवल प्रवासियों के लिए सीमा खोल दी बल्कि उन्हें ले जाने के लिए बसें भी चलाईं

उधर ऑस्ट्रिया ने कहा है कि वह अपनी सीमा में दाखिल होने वाले प्रवासियों की संख्या पर कोई रोक नहीं लगाएगा.

जर्मनी की चांसलर एंगला मर्केल ने भी कहा कि फिलहाल जर्मनी अपने बजट पर कोई ज़ोर डाले बगैर इन प्रवासियों का ख्याल रख सकता है.

इस बीच हंगरी में कुछ और प्रवासियों ने ऑस्ट्रिया जाने की कोशिश की जिससे एक बार फिर हड़बड़ी और अव्यवस्था का माहौल बन गया.

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