क्या है यूरोप का प्रवासी संकट

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मध्य पूर्व और अफ़्रीका से रोज़ाना सैकड़ों की तादाद में पहुंच रहे प्रवासियों से यूरोपीय संघ के देश दवाब में हैं.

अंतरराष्ट्रीय प्रवासी संगठन के मुताबिक़, वर्ष 2015 में जनवरी से अगस्त के बीच 3,50,000 प्रवासियों की पहचान की गई. बीते साल 2,80,000 प्रवासियों की शिनाख़्त हुई थी.

सीरिया और अफ़ग़ानिस्तान में राजनीतिक संकट और इरिट्रिया में दुर्व्यवहार इसकी मुख्य वजहें हैं.

इस दौरान 2,600 प्रवासी भूमध्य सागर पार करने की कोशिश में डूबकर मर गए. कई लोग मानव तस्करों, डाकुओं और अन्य क्रूर लोगों के शिकार बन जाते है.

कहां से आते हैं प्रवासी?

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फ़िलहाल सबसे ज़्यादा प्रवासी सीरियाई नागरिक हैं जो गृहयुद्ध की वजह से भाग रहे हैं.

इसके बाद अफ़ग़ानिस्तान और इरिट्रिया से आए लोग हैं जो ग़रीबी और मानवाधिकार हनन की घटनाओं के कारण भाग रहे हैं.

नाइजीरिया और कोसोवो से भी बड़ी तादाद में प्रवासी यूरोप आ रहे हैं.

इटली पंहुचने वालों में इरिट्रिया से आए लोगों की संख्या सबसे अधिक है, उनके बाद नाइजीरिया से आए लोग हैं.

लेकिन ग्रीस के प्रवासियों में सीरियाई लोग सबसे ज़्यादा हैं, उनके बाद अफ़गानों का नंबर हैं.

कहां जाना चाहते हैं?

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आश्रय देने के लिए अर्ज़ी मंजूर करने वाले यूरोपीय संघ के देशोें में जर्मनी सबसे उदार है. इस साल के अंत तक वहां आठ लाख शरणार्थियों के पंहुचने की संभावना है.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ लगभग 3,000 लोग रोज़ाना मेसीडोनिया पंहुच सकते हैं. इनमें से कई सर्बिया चले जाते हैं.

सर्बिया कहना है कि इस साल अब तक 90,000 प्रवासी वहां पहुंच चुके हैं. ये लोग सर्बिया से हंगरी जाना चाहते हैं. हंगरी को पासपोर्ट मुक्त शेनजेन इलाक़े का प्रवेश द्वार माना जाता है.

बीते जुलाई में सर्बिया से हंगरी जाते हुए 34,000 प्रवासियों की पहचान की गई थी. तंग आकर हंगरी ने सीमा पर 175 किलोमीटर लंबी कंटीली बाड़ लगा दी है.

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डब्लिन दिशा-निर्देशों के मुताबिक़, यूरोपीय संघ के जिस देश में लोग पहले पहुंचें, आश्रय देने पर फ़ैसला उसे ही लेना होता है. ग्रीस की शिकायत है कि उसके यहां बहुत लोग पहले ही पहुंच चुके हैं.

सीरिया से आए लोगों को पनाह देने पर जर्मनी राजी हो गया है, पर उसने दूसरे लोगों के लिए डब्लिन दिशा-निर्देश मानने से इनकार कर दिया है.

फ़िनलैंड भी प्रवासियों को स्वीकार कर रहा है और उसने लोगों को ग्रीस वापस भेजना बंद कर दिया है.

ऑस्ट्रिया का कहना है कि वह इस साल 80,000 अर्जियां ले सकता है.

फ़्रांस के काले में हज़ारों प्रवासियों ने डेरा डाल रखा है. इनमें से कई तो ख़तरा झेलते हुए भी यूरोटनल के ज़रिए ग़ैर क़ानूनी रूप से ब्रिटेन में दाखिल होने की फ़िराक में है.

नेता क्या कर रहे हैं?

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यूरोपीय संघ के नेताओं ने यूरोपीय संघ की सीमा नियंत्रण एजेंसी फ्रंटेक्स को दी जाने वाली राशि तीन गुना बढ़ा दी है.

लेकिन फ्रंटेक्स का कहना है कि उसे रक़म नहीं मिली है जिससे वह ग्रीस और हंगरी की मदद कर सके.

यह संगठन प्रवासियों का पता लगाता है और संकट में फंसने पर उनकी मदद करता है.

इटली ने प्रवासियों का पता लगाने और उन्हें बचाने के लिए मारी नोस्ट्रम स्थित केंद्र धन की कमी के कारण बंद कर दिया है.

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यूरोपीय आयोग ने सदस्य देशों से कहा कि वे सीरिया और इरीट्रिया से आए 40,000 लोगों को स्वीकार कर लें. सीरिया और इरीट्रिया 32,500 लोगों को लेने पर राज़ी हो गए हैं.

इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त के शिविरों में मौजूद दूसरे 20,000 शरणार्थी भी यूरोपीय संघ के देशों में भेजे जाएंगे.

क्या यूरोपीय संघ के देश अपना काम कर रहे हैं?

यूरोपीय संघ के 28 देशों के लिए एकीकृत शरणार्थी नीति अपनाना थोड़ा मुश्किल है. सबकी अपनी न्यायपालिका है और अलग अलग पुलिस बल हैं.

आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. कई यूरोपीय देशोें में बेरोज़गारी है और वहां विदेशी मजदूरों को पसंद नहीं किया जाता है.

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शरणार्थियों को किस तरह आपस में बांटा जाए, इस पर ये देश एकमत नहीं हैं.

यूरोपीय आयोग के मुताबिक़, यूरोपीय संघ के पास शरण की गुज़ारिश करने वालों की तादाद वर्ष 2014 में 6,26,065 तक पहुंच गई थी.

शरण देने वालों में जर्मनी सबसे आगे था, उसके बाद सबसे ज्यादा लोगों को स्वीडन और इटली ने स्वीकार किया.

प्रवासियों को शरण कैसे मिलती है?

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शरणार्थियों को यह साबित करना होता है कि वे अपने देश में उत्पीड़न के शिकार हैं और उन्हें वापस भेजा गया तो उनकी मौत भी हो सकती है.

यूरोपीय संघ के नियम के मुताबिक़, शरण मांग रहे लोगों को स्वागत केंद्रों पर भोजन, दवा और आश्रय का हक़ है. उन्हें शुरू में ही शरण मिल सकती है. नाकाम होने पर वे अदालत जा सकते हैं.

शरण मांगने वालों को पंहुचने के नौ महीने के अंदर काम का अधिकार मिलना चाहिए.

हाल के कुछ वर्षों में यूरोपीय संघ ने 1,04,000 लोगों को शरण दी है.

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