शरणार्थियों को दोबारा बसाने पर मतभेद जारी

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यूरोपीय संघ के मंत्रियों में 120,000 शरणार्थियों के पुनर्स्थापन पर ब्रसेल्स में हुई बैठक में किसी तरह की रज़ामंदी नहीं हो पाई.

ज़्यादातर देश अक्तूबर में फिर से बातचीत करना चाहते हैं.

इससे पहले यूरोप के और देशों ने सीमा पर ग़ैर-क़ानूनी आवागमन को रोकने के लिए बॉर्डर चेक पोस्ट खड़े कर दिए हैं. जर्मनी ने भी ऑस्ट्रिया से लगी सीमा पर लोगों की जांच शुरू कर दी है.

हंगरी ने तो नया क़ानून पारित कर दिया है जिसके भीतर अगर कोई वहां ग़ैर-क़ानूनी तौर पर घुसता है तो उसे गिरफ़्तार कर लिया जाएगा.

'कोटा हल नहीं है'

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चेक रिपब्लिक, स्लोवाकिया और हंगरी जैसे देश अनिवार्य कोटा के विरोधी हैं.

स्लोवाकिया के आंतरिक मामलों के मंत्री रॉबर्ट कालिनाक ने कहा, “कोटा सिस्टम कोई हल नहीं है.”

बातचीत के बाद लग्ज़मबर्ग के विदेश मंत्री जॉं ऐसेलबॉर्न ने कहा, “इस वक़्त सभी देश एक बात पर सहमत नहीं हैं.”

विभिन्न देशों के मंत्री हालांकि इस बात पर राज़ी हो गए कि गर्मी से पहले क़रीब 40,000 शरणार्थियों को ग्रीस और इटली से दूसरे यूरोपीय यूनियन के देशों में भेजा जाए.

यूरोप के जटिल नियमों के मुताबिक़ देशों में एकमत होना ज़रूरी नहीं और फ़ैसला बहुमत के आधार पर किया जा सकता है.

उधर संवाददाताओं के मुताबिक़ यूरोपीय यूनियन के देश ये संदेश देने की कोशिश करेंगे कि वो इस मुद्दे पर एकमत हैं.

यूरोप पहुंच रहे शरणार्थी सीरिया, इराक़, अफ़ग़ानिस्तान और इरिट्रिया जैसे देशों में जारी युद्द, उत्पीड़न और ग़रीबी के कारण भाग रहे हैं.

कई शरणार्थियों ने ग्रीस, हंगरी में ख़ुद को रजिस्टर करने से मना कर दिया. उन्हें डर है कि ऐसा करने पर उन्हें जर्मनी या दूसरे यूरोपीय देशों में आश्रय नहीं मिलेगा.

उधर संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यूरोप के देशों द्वारा सीमा पर रोक की घोषणा से शरणार्थी क़ानूनी परेशानियों में फंस सकते हैं.

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