हंगरी-सर्बिया सीमा पर फंसे शरणार्थी

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हंगरी और सर्बिया की सीमा पर लगी कंटीली तारों से झांक रहे प्रवासी सीमा पर लगाए गए तारों के विरोध में नारेबाज़ी कर रहे हैं.

सर्बिया से लगती सीमा को हंगरी द्वारा बंद किए जाने के बाद सैकड़ों प्रवासी सर्बिया में रात गुज़ार रहे हैं.

इन प्रवासियों ने जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्कल के नाम की तख़्तियां पकड़ रखी हैं. प्रवासियों के हाथों में 'यूरोप शर्म करो' जैसे नारे लिखी तख़्तियां भी हैं.

कठोर क़ानून

हंगरी ने मंगलवार को सर्बिया से लगी अपनी सीमा को कंटीले तारों से सील कर दिया था. इसके साथ ही प्रवासियों के हंगरी में दाख़िल होने पर पाबंदी लगाते हुए हंगरी ने नए कठोर क़ानून लागू कर दिए थे.

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हंगरी और सर्बिया को जोड़ने वाली मुख्य सड़कों को भी हंगरी सरकार ने सील कर दिया है.

सर्बिया के गृहमंत्री नेबूसा स्टेफ़ानोविच ने सीमा पर पहुँच कर सीरियाई शरणार्थियों से मुलाक़ात की और कहा कि उनका देश मदद करेगा.

उन्होंने कहा, ''मैं कल सुबह हंगरी के अधिकारियों से बात करूंगा, जैसा कि हम पिछले कुछ दिनों से करते आ रहे हैं. हम जितना मुमकिन होगा उतना उन्हें खुला रास्ता देने की कोशिश करेंगे ताकि वो आगे बढ़ सकें और अपने परिवारों से मिल सकें.''

उन्होंने कहा, ''कुछ प्रवासी पहले ही आगे निकल चुके हैं. इसलिए जितना संभव हो सकता है मैं हंगरी के अधिकारियों को मनाने की कोशिश करूंगा ताकि प्रवासी अपना सफ़र जारी रख सकें.''

सर्बिया के गृहमंत्री ने कहा, ''इस बीच हम प्रवासियों को भोजन, दवाएं और पानी मुहैया कराएंगे और जितना हो सकेगी मानवीय मदद करेंगे.''

पुलिस की तैनाती

इस बीच चेक गणराज्य ने भी ऑस्ट्रिया से देश में दाख़िल हो रहे प्रवासियों की जांच के लिए पुलिस बल तैनात किए हैं.

सरकार का कहना है कि ऐसा चेक गणराज्य के रास्ते जर्मनी में दाख़िल होने की कोशिश कर रहे लोगों को रोकने के लिए किया जा रहा है.

चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री का कहना है कि ये सुरक्षा चौकसी अस्थायी है.

मध्यपूर्व में जारी संघर्षों से प्रभावित हज़ारों लोग रोज़ाना यूरोप में दाख़िल होने की कोशिशें कर रहे हैं. इससे यूरोप में शरणार्थी संकट पैदा हो गया है.

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