ख़तरे में हैं यूरोप की सीमाएं: हंगरी

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हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने कहा है कि प्रवासियों के कारण यूरोप की सीमाएं ख़तरे में पड़ रही हैं.

ये बात उन्होंने प्रवासी संकट से निपटने के लिए सघन कूटनीतिक पहल की शुरुआत के मौके पर कही, जो हफ़्ते भर चलेगी.

ओरबान ने कहा कि प्रवासी 'दरवाज़ों को तोड़ रहे हैं' और इसलिए इस समस्या से एकजुट होकर निपटने की ज़रूरत है.

प्राग में पोलैंड, हंगरी, चेक गणराज्य और स्लोवाकिया के विदेश मंत्रियों की मुलाक़ात हो रही है.

ये सभी देश यूरोपीय संघ के उस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं जिसमें सभी सदस्य देशों से अनिवार्य रूप से प्रवासियों को अपने यहां जगह देने को कहा गया है.

हंगरी में नया क़ानून

जर्मनी और फ्रांस इस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं जो ग्रीस, इटली और हंगरी में मौजूद एक लाख बीस हज़ार प्रवासियों को यूरोप के अन्य देशों में जगह देने से जुड़ा है.

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ओरबान ने कहा, "वो हम पर चढ़ कर जा रहे हैं."

उन्होंने कहा, "वो न सिर्फ दरवाज़े को धड़धड़ा रहे हैं, बल्कि दरवाज़ों को भी तोड़ रहे हैं. हमारी सीमाएं ख़तरे में हैं. पूरा हंगरी और पूरा यूरोप ख़तरे में है."

उनका ये बयान हंगरी की संसद में सेना को अधिक शक्ति दिए जाने पर बनी सहमति के बाद आया है.

नया क़ानून सेना को रबड़ की गोलियां, आंसू गैस के गोले दागने और सीमा पर प्रवासियों को नियंत्रित करने के लिए नेट गनों का इस्तेमाल करने का अधिकार देता है.

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