विदेशी सैनिक निकाल दो, वार्ता संभव: तालिबान नेता

अफ़ग़ान तालिबान
Image caption फ़ाइल फोटो

अफ़ग़ान तालिबान के नेता मुल्ला मंसूर ने संकेत दिए हैं कि वे अफ़ग़ानिस्तान सरकार से शांति वार्ता कर सकते हैं बशर्ते सरकार सभी विदेशी सुरक्षा बलों को वापस भेज दे और अमरीका के साथ किए गए सुरक्षा समझौते को रद्द कर दे.

बकरीद से पहले जारी किए गए संदेश में मुल्ला मंसूर ने सभी तालिबानी गुटों से एकजुट होने का आह्वान भी किया है.

अपने संदेश में मुल्ला मंसूर ने कहा, "अगर देश विदेशी शासन के अधीन नहीं होगा तो अफ़ग़ान लोगों की समस्याएं आपसी समझ से सुलझा ली जाएंगी."

अमरीका से सुरक्षा समझौता

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Image caption सुरक्षा समझौते के तहत अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैन्य बल तैनात हैं.

मुल्ला मंसूर ने कहा, "अगर काबुल प्रशासन युद्ध समाप्त करना और शांति स्थापित करना चाहता है तो यह विदेशी सैन्य बलों को वापस भेजकर और आक्रमणकारियों के साथ किए गए सभी सुरक्षा और सैन्य समझौते रद्द करके संभव है."

अफ़ग़ान सरकार और अमरीका के बीच 2014 में सुरक्षा समझौता हुए था. इसके तहत अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करने के लिए तेरह हज़ार विदेशी सैनिक, जिनमें से अधिकतर अमरीकी हैं, अफ़ग़ानिस्तान में तैनात रह सकते हैं.

मुल्ला मंसूर ने अपने बयान में अमरीका पर तालिबान के भीतर अविश्वास और कलह का माहौल बनाने के आरोप भी लगाए.

उन्होंने कहा कि इस अहम समय में तालिबान को एकजुट रहने की ज़रूरत है.

जुलाई में मुल्ला उमर की मौत की ख़बर के बाद सरकार और तालिबान के बीच जारी शांति वार्ता पटरी से उतर गई थी.

मुल्ला उमर की 2013 में मौत हो गई थी. हालांकि उनकी मौत का ऐलान इसी साल किया गया है.

मुल्ला उमर की मौत के बाद मुल्ला मंसूर को तालिबान का प्रमुख बनाए जाने से तालिबान के भीतर ही मतभेद उभर आए हैं.

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