'हज के हताहतों की तत्काल शिनाख़्त मुश्किल'

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गुरुवार को हज के दौरान मची भगदड़ में 700 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई और 800 से अधिक लोग घायल हुए हैं.

मीना में हुए इस हादसे के बाद वहाँ क्या हालात हैं और हज यात्रियों को किन मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है, इसी सिलसिले में बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन ने बात की अरब न्यूज़ के संपादक सिराज वहाब से.

उन्होंने बताया कि तेज़ गर्मी ने भगदड़ में फंसे हज यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.

वहाब के मुताबिक़ अराफात में शाम की नमाज़ के बाद हज यात्री मीना की तरफ आ रहे थे. इसी दौरान शैतान को (प्रतीकात्मक) कंकड़ मारने की रस्म हो रही थी. वहां एक पुल है, जहां बड़ी तादाद में लोगों के जमा होने के कारण भगदड़ मचने से ये हादसा हुआ.

पहले भी हुआ है ऐसा हादसा

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हालाँकि अभी ये पता नहीं चल पाया है कि भगदड़ की असल वजह क्या थी. छह-सात साल पहले भी ऐसा ही हादसा हुआ था.

क्योंकि यहाँ बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं और जगह सिर्फ़ दोमंजिला थी. इसलिए इस इलाके को बड़ा किया गया और अब ये पांच मंज़िला है.

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तो मुमकिन है कि किसी एक फ्लोर पर बड़ी तादाद में लोग इकट्ठा हो गए होंगे और कोई गिर गया होगा, जिससे ये हादसा हुआ.

घायलों की हालत काफी खराब है, क्योंकि इस वक्त वहां बहुत गर्मी है और तापमान करीब 45 डिग्री है.

लिहाज़ा बहुत सारे लोग जो भीड़ में फंस गए वो गर्मी से बेहोश हो गए.

घायलों को मीना और मक्का के अस्पतालों में ले जाया जा रहा है. घायल ये बताने की हालत में भी नहीं हैं कि आखिर वहां हुआ क्या था.

शिनाख़्त मुश्किल

घायलों को देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता है ये हादसा जिस खेमे में हुआ वहां अधिकतर अल्जीरिया और नाइजीरिया के लोग थे.

लेकिन ये ज़रूरी नहीं है कि इन्हीं देशों के लोग घायलों में हों. क्योंकि कंकड़ मारने की रस्म एक ही समय में सभी हज यात्री अदा करते हैं.

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तो घायलों में पाकिस्तान और भारत के लोग भी हो सकते हैं.

ये लोग किन देशों से हैं, ये ठीक-ठीक बताना मुश्किल है क्योंकि जिस वक़्त ये हादसा हुआ हज यात्री एहराम पहने हुए थे.

उनके गले में कोई बैज भी नहीं हैं जिनसे उनकी शिनाख्त की जा सके.

इसलिए हमारा मानना है कि इस हादसे में जो लोग मारे गए हैं या घायल हुए हैं, वो अलग-अलग देशों के हैं.

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