'क्लाइमेट चेंज के साथ क्लाइमेट जस्टिस भी हो'

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता के लिए बदलाव ज़रूरी है.

शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र में सतत विकास पर आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि बदलाव की सुरक्षा परिषद समेत संयुक्त राष्ट्र के तमाम अंगों में जरूरत है.

मोदी ने कहा कि न्यायपूर्ण व्यवस्था और सतत विकास के लिए दुनिया भर से गरीबी हटाना ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि भारत ने विकास का जो मार्ग चुना है उसमें और संयुक्त राष्ट्र के मार्ग में समानता है.

गरीबों के लिए भारत में चल रही कई योजनाओं का ज़िक्र करते हुए मोदी ने कहा कि भारत गरीबी ख़त्म करने के लिए निरंतर प्रयासरत है.

मोदी ने कहा, “समूचा विश्व एक दूसरे से जुड़ा हुआ है, एक दूसरे पर निर्भर है और एक दूसरे से संबंधित है. इसलिए हमारी अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी को भी पूरी मानवता के कल्याण को अपने केंद्र में रखना होगा. सुरक्षा परिषद समेत संयुक्त राष्ट्र में भी सुधार अनिवार्य हैं.”

संकल्प का भाव

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पर्यावरण का ज़िक्र करते हुए मोदी ने कहा कि क्लाइमेट चेंज के साथ ही क्लाइमेट जस्टिस की बात भी होनी चाहिए ताकि पर्यावरण को लेकर एक संकल्प का भाव पैदा हो.

मोदी ने अपने भाषण में कई अहम मुद्दों का ज़िक्र करते हुए कहा कि गरीबी को खत्म करना, महिलाओं को अधिकृत करना और जलवायु परिवर्तन से निपटना सभी देशों का सर्वोच्च लक्ष्य होना चाहिए.

प्रधानमंत्री ने भारत का ज़िक्र करते हुए कहा, “जब से हमने आज़ादी हासिल की है हम गरीबी को खत्म करने में लगे हैं. शिक्षा और क्षमता के विकास हमारी प्रथामिक्ताएं हैं.”

इससे पहले उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून से मुलाकात की. बान की मून ने भारत के स्वच्छता अभियान की तारीफ की.

शनिवार को मोदी जी-4 समूह की बैठक की मेज़बानी करेंगे और उसमें जर्मनी, जापान और ब्राजील के नेता भी शामिल होंगे.

नारेबाज़ी

दस वर्षों के बाद होने वाली इस अहम बैठक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता की इन चारों देशों की मांग को तेज़ करने पर चर्चा होगी.

शुक्रवार को ही प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ देशों के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें भी कीं जिनमें श्रीलंका, भूटान और मिस्र शामिल हैं.

न्यूयॉर्क से पत्रकार सलीम रिज़वी के अनुसार संयुक्त राष्ट्र में भाषण के दौरान ही इमारत के बाहर 60-70 लोग प्रधानमंत्री मोदी की हिमायत में नारेबाज़ी कर रहे थे, तो वहीं विभिन्न मुद्दों पर नाराज़गी ज़ाहिर करते कई प्रदर्शनकारी भी मौजूद थे.

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इनमें गुजरात में पटेल समुदाय के आंदोलन से संबंधित प्रदर्शन के अलावा कुछ भारत-विरोधी नारे लगाते सिख समुदाय के लोग भी मौजूद थे. और एक अन्य गुट कश्मीरी लोगों का भी था जो जम्मू-कश्मीर में भारत द्वारा कथित मानवाधिकार उल्लंघन पर नारेबाज़ी कर रहा था.

मोदी से नाराज़ पटेल समुदाय के करीब 50 लोग संयुक्त राष्ट्र के सामने प्रदर्शन कर रहे थे. उनकी मांग है कि गुजरात में पटेल आंदोलन के दौरान कुछ लोगों के खिलाफ़ पुलिस की कथित हिंसा की जांच की जाए औऱ दोषियों को सज़ा दी जाए.

अारक्षण ख़त्म करने की मांग

इसके अलावा उनकी मांग थी कि आरक्षण या तो सिरे से खत्म कर दिया जाए या फिर भारत में सभी को आरक्षण का फायदा दिया जाए.

गुजरात सरकार द्वारा एक आर्थिक पैकेज के एलान से भी यह लोग संतुष्ट नहीं हैं.

उधर पटेल समुदाय के एक अन्य गुट ने प्रधानमंत्री मोदी से न्यूयॉर्क में होटल में मुलाकात की जिसमें उन्होंने अपनी मांगें सामने रखीं.

इस गुट के नेता अलपेश पटेल ने बताया, “हमने मोदी जी से मिलकर उनको अपनी समस्या बताई और उन्होंने ध्यान से बात सुनी. उन्होंने आश्वासन दिया है कि पुलिस की हिंसा के मामले में जांच जारी है और उसी के हिसाब से कदम उठाया जाएगा.”

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में दुनिया भर के नेताओं को पोप फ्रांसिस ने भी संबोधित किया. उन्होंने मानवता के लिए लोगों से पर्यावरण के अधिकार का सम्मान करने की अपील की.

पोप फ्रांसिस ने वित्तीय संस्थाओं से अपील की कि वे देशों पर कठोर कर्ज़ प्रणाली न थोपें जो कि ग़रीबी को बढ़ाती हैं.

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