जहां भारतीय और पाकिस्तानी में नहीं है भेद

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अमरीका के कैलिफ़ोर्निया प्रांत में स्थित सिलिकॉन वैली की क़रीब आधी तकनीकी कंपनियां प्रवासियों ने स्थापित की हैं.

इनमें 16 प्रतिशत कंपनियां शुरू करने वाले भारतीय आगे हैं. सिलिकॉन वैली में युवा और बुज़ुर्ग, विभिन्न धर्मों और नस्लों के लोग एक साथ काम करते हैं.

सिलिकॉन वैली की सफलता का मूलमंत्र यह है कि विविधता से अाविष्कार बढ़ता है. नागरिकों और प्रवासियों को बराबर मौक़ा मिलने से इसमें फ़ायदा होता है.

सफल उद्यमी समुदाय बनाने की कुंजी है नेटवर्किंग और सही सलाह. भारतीयों ने यहां टीआईई जैसे नेटवर्किंग समूह और भारतीय सामुदायिक केंद्र जैसी शुरूआत की है.

यहां उपमहाद्वीप के हर हिस्से से लोग समान रूप से आगे आते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं. यहां भारतीय और पाकिस्तानी में भी कोई भेद नहीं.

सिलिकॉन वैली में न तो किसी प्रकार का कोई कोटा है और न ही सकारात्मक कार्य योजनाएं. प्रतियोगिता और क्षमता ही काम का आधार है.

कुछ समुदाय पीछे ज़रूर हैं लेकिन वे भारतीयों की ही तरह साथ आएं तो तरक्की कर सकते हैं.

'उद्यमी यहां हीरो हैं'

यहां जोखिम उठाने, असफल होने पर प्रोत्साहन मिलता है, उद्यमी यहां हीरो हैं. ऐसा नहीं है कि असफलता तारीफ़ करने वाली बात है लेकिन यह सफलता की दिशा की पहली सीढ़ी है.

इसलिए असफलता को सामाजिक बुराई नहीं माना जाता. इसके विपरीत इसे एक सम्मान का विषय माना जाता है जिससे पता चलता है आपने अपने सबक सीख लिए हैं.

यह कारण है कि सिलिकॉन वैली नए आविष्कारों का गढ़ है और यहां नए बिज़नेस मॉडल्स के साथ काफ़ी प्रयोग होते हैं. सरकारें अाविष्कार तो नहीं कर सकतीं लेकिन ग़ैर ज़रूरी नियम और बाधाएं हटाकर इसके लिए उचित माहौल बना सकती हैं.

अमरीका की सरकार वास्तव में सिलिकॉन वैली के कामकाज में कोई भूमिका नहीं निभाती. वह आधारभूत शोध के लिए धन मुहैया कराती है जिसका इस्तेमाल शिक्षा और मूलभूत ढांचे के व्यावसायिकरण में किया जा सकता है.

सरकार कोशिश करती है कि वह उद्यमियों के रास्ते में न आए, ताकि वे अपना काम आसानी से कर सकें.

उद्योग जगत

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टेस्ला और स्पेसएक्स कंपनी बनाने वाले इलोन मस्क जैसे प्रवासी सिलिकॉन वैली से ही पूरे उद्योग जगत को बदल रहे हैं. वे तारों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.

हालांकि इस अंधी उम्मीद में कि टेक्नोलॉजी में कुछ भी संभव है, तकनीकी जगत कभी-कभी काफ़ी आगे चला जाता है.

इन्हीं वजहों से उन समस्याओं की उपेक्षा कर देता है जो इस कारण से पैदा होती हैं. लेकिन आज भारत को ऐसे ही 'कुछ भी कर सकते हैं' वाले दृष्टिकोण की ज़रूरत है.

यह इसलिए क्योंकि अद्भुत चीज़ें बनाना अब वाकई संभव हो रहा है. भारत अाविष्कार की इस दुनिया का नेतृत्व कर सकता है और न सिर्फ़ अपनी बल्कि दुनिया की समस्याएं भी हल सकता है.

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