सिलिकॉन वैली से क्या चाहते हैं मोदी?

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नरेंद्र मोदी भारत के इतिहास में पिछले तीन दशक से भी ज़्यादा समय में सिलिकॉन वैली का दौरा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं.

सिलिकॉन वैली में विकसित हुई तकनीक ने भारत में बड़े पैमान पर बदलाव लाया है.

मोदी के सिलिकॉन दौरे का मक़सद था कि तकनीकी तौर पर भारत में बदलाव का सिलसिला आगे भी बना रहे.

रविवार को सेन जोस स्टेडियम में भारतीय मूल के 20,000 से अधिक अमरीकियों ने मोदी का स्वागत किया.

मोदी का दौरा ऐसे वक़्त में हुआ है जब सिलिकॉन वैली में भारतीय और भारतीय अमरीकियों की सफ़लता की धूम मची है.

एक ओर माइक्रोसॉफ्ट के करिश्माई सत्या नडेला, 10 साल से शांतनु नारायण के नेतृत्व में दिन दूनी रात चौगुनी आगे बढ़ता एडोबी, और हाल ही में गूगल के सीईओ के रूप में सुंदर पिचई जैसे सिलिकॉन वैली के दिग्गज - इन सबका संबंध भारत से है.

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यहां रहने वाले भारतीयों का कहना है कि उनकी कामयाबी का राज़ प्रतिभा और स्पर्धा का कमाल है.

वैली के भारतीय मूल के तकनीकी प्रबंधक मोहित आरोन बताते हैं, "अगर सिलिकॉन वैली में मेरे स्कूल का कोई पुराना दोस्त कंपनी शुरू करे, तो मैं उससे भी बेहतर एक कंपनी खोल कर दिखाउंगा."

सिलिकॉन वैली और भारतीय

भारत में बड़े बहुमत के साथ सरकार बनाने वाले नरेंद्र मोदी के चाहने वाले अमरीका में भी बड़ी संख्या में हैं.

हाल में अमरीका में किए गए एक शोध के मुताबिक यहां के 87 फीसदी भारतीयों की राय मोदी के बारे में ' अच्छी' है.

लेकिन जहां स्टेडियम के बाहर उनके चाहने वालों का उत्साह पूरे शबाब पर दिखा वहीं उनकी सरकार का विरोध दर्ज करने वाले भी वहां मौजूद थे.

'टीम मोदी' के आलोचक मोदी के अतीत को नजरअंदाज़ कर दिए जाने से नाराज हैं.

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उनकी शिकायत है कि गुजरात 2002 के दंगों में मुसलमानों की हत्या को रोकने के लिए नरेंद्र मोदी ने कुछ नहीं किया.

आलोचकों की आवाज़

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डिजिटल इंडिया के ज़रिए इंटरनेट से अधिक से अधिक संख्या में भारतीयों को जोड़ना चाहते हैं.

लेकिन उनके आलोचकों का कहना है कि उनकी मंशा कुछ और ही है. वे लोगों की गतिविधियों पर व्यापक निगरानी रखना चाहते हैं.

इससे चिंतित लोगों ने मोदी के सिलिकॉन दौरे के पहले एक लेटर जारी किया जिस पर अकादमिक जगत से जुड़े 100 लोगों ने दस्तख़त किए.

उनका मानना है कि मोदी की सकारात्मकता, ख़ासतौर पर भारतीय प्रेस में, उनके आलोचकों के हमले से निपटने की सरकार की कोशिश है.

इन सबके बावजूद अमरीका में मोदी के समर्थकों की कमी नहीं. मोदी का हाईटेक सेवी अंदाज़ लोगों को प्रभावित करता है.

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स्टेडियम के बाहर खड़े एक समर्थक का कहना है, “हमें नाज़ है.”

सेन जोस में सिलिकॉन वैली का सैप सेंटर सही मायने में कामयाब भारतीयों का इलाक़ा है.

यहां की लगभग 26 फीसदी तकनीकी कंपनियों को चलाने या उसकी नींव रखने वाले भारतीय और भारतीय अमरीकी हैं.

मोदी का नारा

सिलिकॉन वैली से निवेश भारत ले जाने के लिए नरेंद्र मोदी को मदद की ज़रूरत है.

इससे पहले की भारत तकनीकी क्षेत्र में एक बड़े खिलाड़ी के रूप में उभरे ज़रूरत है बुनियादी बातों पर ध्यान देने की.

मोदी का कहना है, "भारत को हाईवे के साथ ही आई-वे की भी ज़रूरत है." इससे उनका तात्पर्य ये है कि भारत का हर शहर और गांव इंटरनेट से जुड़े.

आम आदमी

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इससे पहले रविवार को मोदी ने कैलिफोर्निया में फेसबुक मुख्यालय में कंपनी के संस्थापक मार्क जकरबर्ग के साथ सवाल जवाब सत्र में हिस्सा लिया.

मोदी के लिए 40,000 से अधिक सवाल आए जिसमें से केवल तीन ही पूछे जा सके.

क़रीब एक घंटे तक चले इस सत्र का संचालन कर रहे ज़करबर्ग का अंतिम सवाल मां के बारे में था.

मोदी जवाब देते हुए बहुत भावुक हो गए. ये बताते हुए उनकी आंखें छलक पड़ी कि 'हम ग़रीब थे और मां को दूसरों के घरों में बर्तन साफ़ करने का काम करना पड़ता था.'

एक बुज़ुर्ग भारतीय महिला ने बाद में बताया कि उनकी बातें सुनकर लगा कि वे भी 'बिलकुल हम जैसे ही हैं'.

बाज़ार भारत

फेसबुक मुख्यालय में नरेंद्र मोदी और मार्क ज़करबर्ग के बीच की मुलाक़ात दोनों के लिए फायदेमंद रही. फेसबुक यूजरों की संख्या और इसका वैश्विक प्रभाव बढ़ाने को उत्सुक ज़करबर्ग ने एक अरब से अधिक भारतीयों को इंटरनेट से जोड़ने की संभावना पर बात की.

पूरे सत्र में बातचीत के दौरान मोदी ने यह उम्मीद भी जताई कि ज़करबर्ग की मंशा केवल फेसबुक के बैंक बैलेंस को लेकर नहीं है.

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मोदी के लिए सिलिकॉन वैली का दौरा तकनीकी दिग्गजों के ऊपर दबाव बनाने की एक कोशिश है. वे चाहते हैं कि भारत जिसकी छवि कॉल सेंटर और सस्ते मज़दूर की रही है वो बदलकर तकनीकी क्षेत्र का आकर्षक हब बन जाए.

दरअसल वे भारत को किसी भी तरह का बिज़नेस शुरू करने वाला सबसे संभावनाशील देश बनाना चाहते हैं. वे चाहते हैं कि कैलिफोर्निया की ओर देखने वाले हुनरमंद भारतीय, ख़ासकर तकनीक के क्षेत्र में, भारत का रुख़ करें.

सैप सेंटर के बाहर एक अभिभावक सुंदर साड़ी पहने अपनी बच्चियों के साथ मौजूद थे.

उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है जब उनके बच्चे बड़े होंगे तो अपना करियर बनाने के लिए वापस भारत लौटेंगे, उसी तरह जैसे वे बेहतर जिंदगी की तलाश में भारत से अमरीका आए.

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