रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ओबामा को पछाड़ा?

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अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच रिश्ते कितने सर्द और रुखे हैं, ये बात कूटनीतिक प्रोटोकॉल से भी नहीं छिप पाती है.

बीते दिनों संयुक्त राष्ट्र में ये बात बख़ूबी देखने को मिली. एक लंच के दौरान ओबामा ने वाइन के ग्लास से ग्लास टकराने के लिए पुतिन को इंतज़ार कराया.

वहीं, बातचीत से पहले जब दोनों नेताओं को हाथ मिलाना था, तो तस्वीरों में पुतिन को हिचकिचाते देखा जा सकता था.

वर्ष 2013 के बाद इन दोनों नेताओं का यूं तो कई सम्मेलनों में आमना-सामना होता रहा है लेकिन ये दोनों की एक दूसरे से आमने-सामने या कहिए वन-टू-वन पहली मुलाक़ात थी.

हालांकि पुतिन ने ये ज़रूर कहा कि उनके बीच फ़ोन पर बात होती रहती है.

कौन जीता कौन हारा

जर्मन पत्रिका 'श्पीगल' ने अपनी वेबसाइट पर लिखा कि अगर मीडिया में होने वाली टिप्पणियों के आधार पर देखें तो इस तनातनी में जीत पुतिन की हुई.

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कई जानकार मानते हैं कि पुतिन दुनिया का ध्यान सीरिया के मुद्दे पर केंद्रित करने में कामयाब रहे जबकि ओबामा पूर्वी यूक्रेन में रूस के हस्तक्षेप की निंदा कर उसे उठा रहे थे.

रूसी जनता को पुतिन सीरिया के संकट को सुलझाने में ओबामा के बराबर या कहें उनसे आगे नज़र आए.

यूक्रेन संकट को लेकर पश्चिमी जगत ने भले ही रूस पर प्रतिबंध लगा रखे हों लेकिन रूस राजनयिक तौर पर कहीं अलग थलग नहीं दिखा.

जब फ़ोटो खिंचाने की बारी आई तो पुतिन ओबामा से ज़्यादा मुस्कराते हुए दिख रहे थे, हालांकि कुछ लोग ये कह रहे हैं कि पुतिन ताना कसने वाले अंदाज़ में मुस्करा रहे हैं.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार रूसी नेता ने संयुक्त राष्ट्र में सीरिया संकट पर दुनिया का ध्यान केंद्रित कर मैदान मार लिया.

वहीं समाचार एजेंसी एपी ने कहा कि यूक्रेन के मुद्दे से फ़ोकस हटाना पुतिन की ध्यान खींचने की क्षमता को दर्शाता है.

दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र में दिए अपने भाषणों में एक दूसरे पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी और मध्य पूर्व और यूक्रेन में एक दूसरे की नीतियों पर जमकर हमला बोला.

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रूस के एक सरकारी टीवी चैनल पर घंटों तक पुतिन के भाषण का विश्लेषण हुआ जिसमें पुतिन की ख़ूब सराहना हुई.

वैसे भाषण की प्रजेंटेशन यानी उसे पेश करने के लिहाज़ से ओबामा को जीता हुआ माना जा सकता है.

सीरिया पर तनातनी

रूसी सरकारी टीवी चैनल पर हो रही बहस में जब एक अमरीकी पत्रकार माइकल बॉम ने ये बताने की कोशिश की कि अमरीका क्यों सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद को पसंद नहीं करता तो बहस में शामिल अन्य लोगों और एंकर ने भी उनकी आवाज़ को दबा दिया.

रूसी संसद ड्यूमा के निचले सदन के उपाध्यक्ष सर्गेई ज़ेलेज़नियाक ने कहा, "आप तो सीरिया नहीं गए हैं, तो मुझे नहीं लगता कि आपके पास इस बारे में कोई विश्वसनीय जानकारी होगी कि कौन किसके लिए लड़ रहा है."

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Image caption रूसी एंकर प्योत्र तोल्सतोए की अमरीकी पत्रकार माइकल बॉम से ख़ूब तकरार हुई

वहीं एंकर प्योत्र तोल्सतोए ने बॉम को बताया, "सीरियाई राष्ट्रपति असद तब तक सत्ता में बने रहेंगे जब तक सीरिया की जनता चाहेगी- ये अमरीकी लोग तय नहीं कर सकते."

बॉम ने यह कह कर जबाव दिया, "वो (असद) क़ानूनी तौर पर निर्वाचित नहीं हुए हैं."

दूसरी तरफ़ कुछ विश्लेषक पुतिन के भाषण से उतने प्रभावित नहीं थे.

मॉस्को एखो रेडियो के व्लादिमीर फारफोमोमीव ने ट्वीट किया- पुतिन को न्यूयॉर्क जाने की ज़रूरत नहीं थी. वो (संयुक्त राष्ट्र में रूस के दूत विताली) चुरकिन से भी ये सब बकवास पढ़वा सकते थे.

वहीं अमरीकी वेबसाइट 'फॉक्स' के मैक्स फ़िशर ने संयुक्त राष्ट्र में खाने की मेज़ पर ओबामा के रवैए की आलोचना की.

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