सीआईए ने चीन से वापस बुलाए जासूस

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Image caption पहचान छुपाने की कोशिश

सरकारी कम्प्यूटरों से डाटा चोरी होने के बाद अमरीकी खुफ़िया एजेंसी सीआईए ने अपने कर्मचारियों को बीजिंग स्थित अमरीकी दूतावास से वापस बुला लिया है.

बीजिंग स्थित अमरीकी दूतावास में चीनी हैकरों की हैकिंग के बाद अमरीका ने दूतावास से सीआईए के सभी जासूसों को वापस बुला लिया है.

इसी साल अप्रैल में हुए हैकिंग की घटना में हैकरों ने क़रीब दो करोड़ दस लाख अमरीकी कर्मचारियों के डेटा चुरा लिए थे.

जिसके बाद से अमरीका और चीन के रिश्तों में एक बार फिर से खटास देखने को मिल रहा है.

चीनी स्टेट हैकर

अमरीका ने चीनी स्टेट हैकरों को इस घटना के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है.

ख़ास बात है कि अब तक अमरीका, चीन पर जासूसी करने का आरोप लगाता रहा है. लेकिन सीआईए के जासूसों का बीजिंग स्थित अमरीकी दूतावास में मौजूद होना अमरीका के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है.

आशंका जताई जा रही है कि जो फाइलें चोरी हुई हैं उनमें कई महत्वपूर्ण जानकारियां मौजूद हो सकती हैं. दूतावास कर्मचारियों के साथ-साथ अगर इनमें सीआईए जासूसों के डाटा भी शामिल हों तो इससे सीआईए ऐजेंट्स के नाम सामने आ जाएंगे. जिससे उनपर ख़तरा मंडरा सकता है.

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सच सामने आएगा

अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी जेम्स क्लैपर ने इस बात का अंदेशा सीनेट आर्मड सर्विस कमेटी के सामने जताया.

क्लैप्टर ने इस बात का भी डर जताया है कि अगर जासूसों की पहचान हो जाती है तो इससे दुनिया के बाक़ी देशों में मौजूद उसके दूसरे जासूसों का सच भी सामने आ जाएगा.

हालांकि क्लैप्टर ने इस बात को माना कि अमरीका भी चीन की तरह ही साइबर हमले करता रहा है.

उधर सीआईए ने इस बारे में कोई प्रतिक्रिया देने से साफ़ इनकार कर दिया है.

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