भरी मेट्रो में गे मैरिज का प्रस्ताव हुआ वायरल

Image caption बीजिंग मेट्रो में एक पुरुष ने दिया पुरुष मित्र को शादी का प्रस्ताव

चीन की राजधानी बीजिंग के अंडरग्राउंड मेट्रो में एक शादी प्रस्ताव चीनी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.

शादी का प्रस्ताव देना कई बहुत बड़ी बात नहीं, फिर इस पर इतनी चर्चा क्यों हो रही है?

दरअसल, एक आदमी ने भरी मेट्रो में अपने ब्वॉयफ़्रेंड को शादी का प्रस्ताव दिया.

घुटने के बल बैठक कर प्रस्ताव देते हुए देख सफ़र कर रहे कई लोगों ने अपने स्मार्टफ़ोन में इस क्षण को क़ैद कर लिया और चीन का फ़ेसबुक कहे जाने वाले सोशल मीडिया वेबसाइट 'वीबो' और ट्विटर पर अपलोड कर दिया.

'अविश्वसनीय'

Image caption मेट्रो के सहयात्रियों ने इस क्षण को कैमरे में क़ैद कर लिया.

ऐेसे ही एक यात्री बाई ईयान विना कहते हैं, "मैं रोज़ की तरह उस दिन भी मेट्रो से घर लौट रहा था. मैंने एक पुरुष जोड़े को उम्मीद के विपरीत प्रेम का इज़हार करते देखा. यह वाक़ई अविश्वसनीय था."

चीन में समलैंगिक विवाह के लिए कोई क़ानूनी प्रावधान नहीं है. जब इस शख़्स ने अपने ब्वॉयफ्रेंड को शादी का प्रस्ताव दिया तो कुछ लोगों ने इसे 'पाप' और 'शर्मनाक' क़रार दिया.

पर इस जोड़े का समर्थन करने भी कुछ लोग सामने आए.

'शर्मनाक'

वीबो पर एक यूज़र ने टिप्पणी की, "जो इसे शर्मनाक कहते हैं, उन्हें दूसरों पर अपना फ़ैसला सुनाने का कोई हक़ नहीं है." इस टिप्पणी को 600 बार 'लाइक' किया गया.

एक दूसरे यूज़र ने टिप्पणी की, "आपको इस जोड़े की हिम्मत की दाद देना चाहिए. लोग भले ही इसे शर्मनाक कहें, पर इस जोड़ ने अपने प्रेम का इज़हार करने की हिम्मत तो दिखाई."

कुछ लोगों ने इस पर असहमति जताई.

'पूरी दुनिया समलैंगिक'

Image caption कई लोगों ने इस 'शर्मनाक' और 'पाप' क़रार दिया.

कुछ महिलाओं ने टिप्पणी की कि भला उन्हें कोई पुरुष पसंद क्यों नहीं करता. एक महिला ने किसी को अपनी ओर आकर्षित करने में नाकाम रहने के लिए दुख जताया और लिखा, "मुझे ऐसा लगता है मानो पूरी दुनिया समलैंगिंक हो गई इसीलिए मैं अब तक कुंवारी ही रह गई हूँ."

अमरीका में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक शादी की अनुमति दे दी, इसके बाद चीन में इस पर बहस छिड़ गई थी. लेकिन राजनीतिक बहस के मामले में दोनों देशों में स्थितियां बिल्कुल अलग हैं.

चीनी मनोचिकित्सक संघ ने 2001 में ही मानसिक रोगों की सूची से समलैंगिकता को बाहर कर दिया. लेकिन चीनी अभिभावक अभी भी इसे सहजता से स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं.

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