पाकिस्तान की पहली महिला फ़ायर फ़ाइटर

पाकिस्तान में 30 लाख से अधिक लड़कियां स्कूल नहीं जा पाती हैं और महिलाएं बुनियादी जरुरतों और अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रही हैं.

बाल विवाह बड़ी समस्या है. ऐसे समाज में महिला फ़ायर फ़ाइटर होना उम्मीद जगाता है.

पुरुषों के दबदबे वाले समाज में 25 वर्षीय शाज़िया परवीन वर्जनाओं को तोड़ रही हैं.

शाज़िया पाकिस्तान की पहली महिला फ़ायर फ़ाइटर हैं.

'कुछ अलग करना था'

शाज़िया बताती हैं कि बचपन से उनकी इच्छा थी कि वे ज़िंदगी में कुछ अलग करें.

वे कहती हैं, "मैं बचपन से ही लोगों की मदद करना चाहती थी. मुझे फ़ायर फ़ाइटर बचपन से ही आकर्षित करते थे. मैं यह साबित करना चाहती थी कि महिलाएं भी फ़ायर फ़ाइटर हो सकती हैं. मुझसे पहले किसी महिला ने इस फ़ील्ड में आने की कोशिश नहीं की थी."

ज़बरदस्त ट्रेनिंग

शाज़िया को ज़बरदस्त ट्रेनिंग दी गई. फ़ायर फ़ाइटिंग ट्रेनिंग के दौरान कैज्युलिटी से निपटने की ट्रेनिंग भी दी गई.

छह सौ पुरुषों में अकेली शाज़िया ने फ़ायर फ़ाइटर की ट्रेनिंग ली थी.

शाज़िया बताती हैं कि वह पिछले पांच वर्षों से काम कर रही हैं. उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा. ट्रेनिंग के दौरान पुरुष साथियों ने काफी मदद भी की.

शाज़िया ने बीबीसी को बताया, " मेरे फ़ायर फ़ाइटर बनने से समाज काफी खुश है. हमारा समाज धार्मिक है. ऐसे में आज भी इमरजेंसी, आगजनी के दौरान पीड़ित महिलाएं नहीं चाहतीं कि कोई अनजान पुरुष उन्हें छुए. ऐसी स्थिति में महिला फ़ायर फ़ाइटर होने से काफ़ी मदद मिलती है."

छोटे गांव से शुरू सफर

शाज़िया पाकिस्तान के दक्षिण पंजाब के एक छोटे से गांव में रहती हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "मैं निगेटिव बातों पर ध्यान नहीं देती हूं. मेरा परिवार मेरे साथ है. इस जॉब में मैं अपने पिता की वजह से हूं, जिन्होंने मुझे यह फॉर्म लाकर दिया था. मैं जो भी कर रही हूं उन्हें मुझ पर गर्व है."

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