ऐपल को लगा 23.4 करोड़ डॉलर का झटका

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एक अमरीकी कोर्ट ने तकनीकी जगत की दिग्गज कंपनी ऐपल को पेटेंट उल्लंघन मामले में हर्जाने के तौर पर विस्कोन्सिन विश्वविद्यालय को 23.40 करोड़ डॉलर चुकाने का आदेश दिया है.

विस्कोन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय की विस्कोन्सिन अलुमनी रिसर्च फाउंडेशन के अनुसार उनके अविष्कारों की सुरक्षा और ग़लत इस्तेमाल रोकने की दृष्टि से यह बेहद अहम फ़ैसला है.

जूरी का कहना है कि ऐपल ने अपने कुछ आईफ़ोन और आईपैड में बिना इजाज़त पेटेंट की गई माइक्रोचिप तकनीक का इस्तेमाल किया है.

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ऐपल का कहना है कि वह इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेगा.

विस्कोन्सिन विश्वविद्यालय ने हर्जाने में 49.9 करोड़ डॉलर की मांग की थी. लेकिन 3 घंटे चली सुनवाई में जूरी ने मांगे गए हर्जाने से 16.5 करोड़ डॉलर कम हर्जाने का फ़ैसला दिया.

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इस माइक्रोचिप से कम्प्यूटर के प्रोसेसर के तेज़ काम करने में मदद मिलती है.

विस्कोन्सिन अलुमनी रिसर्च फाउंडेशन के प्रबंध निर्देशक कार्ल गुरब्रैंडसन ने कहा, ''यह एक ऐसा मामला है जहां विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के कठिन परिश्रम, पेटेंट और लाइसेंस किए जाने वाले अविष्कारों के सम्मान की जीत हुई है. जूरी ने हमारे कैंपस में चल रहे बढ़िया काम को भी मान्यता दी है.''

यह मामला आईफ़ोन 5एस, 6 और 6एस में इस्तेमाल की गई तकनीक से संबंधित है.

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विश्वविद्यालय ने एक और मामला दायर किया है जिसमें ऐपल के नए आईफ़ोन 6एस और 6प्लस में भी इस तकनीक के इस्तेमाल का आरोप लगाया है.

इससे पहले साल 2008 में विस्कोन्सिन विश्वविद्यालय ने इसी पेटेेंट के इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए इंटेल को भी कोर्ट में घसीटा था. बाद में अघोषित रक़म पर दोनों के बीच मामले को निपटा दिया गया था.

साल 2014 में ऐपल की सालाना अाय 182 अरब डॉलर थी.

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