'घड़ी वाले' मोहम्मद ने अमरीका छोड़ा

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अमरीका का वह छात्र जिनकी बनाई घड़ी को बम समझकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था, वह अब पढ़ाई के लिए अपने परिवार के साथ क़तर चले गए हैं.

अमरीका के टेक्सस निवासी अहमद मोहम्मद को क़तर फ़ाउंडेशन फ़ॉर एजुकेशन, साइंस एंड कम्युनिटी डेवलपमेंट ने वज़ीफा दिया है.

मोहम्मद ने सोमवार को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाक़ात की थी.

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मोहम्मद की गिरफ्तारी और हथकड़ी पहनाकर उन्हें स्कूल से पुलिस थाने ले जाने का मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.

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कुछ लोगों का कहना था कि अहमद को नाम और धर्म की वजह से निशाना बनाया गया.

टेक्सस के अधिकारियों ने अपने फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा था कि उन्होंने छात्रों की सुरक्षा के लिए यह क़दम उठाया.

मोहम्मद के परिवार ने एक बयान जारी कर कहा, ''अहमद की गिरफ़्तारी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद हमें सहयोग के जितने प्रस्ताव मिले हैं, उससे हम अभीभूत हैं.''

उन्होंने कहा है, ''व्हाइट हाउस से लेकर, सूडान और मक्का तक में व्यापारिक और शैक्षणिक संगठनों और लोगों ने हमारा स्वागत किया.''

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बयान के मुताबिक़ मोहम्मद को क़तर फ़ाउंडेशन में 'युवा आविष्कारक' के रूप में दाख़िला मिलेगा और पूरा परिवार उनके साथ क़तर में ही रहेगा.

मोहम्मद ने कहा है, ''घूमने के लिए क़तर अच्छी जगह है. दोहा की आधुनिकता को देखते हुए वो उसे बहुत पसंद करते हैं. मैंने वहां बहुत से अच्छे स्कूल देखे, उनमें से कई के परिसर अमरीका के मशहूर विश्वविद्यालयों जैसे हैं. उनके शिक्षक बहुत अच्छे हैं. मुझे लगता है कि वहां बहुत कुछ सीखने को मिलेगा और मज़ा भी आएगा.''

गिरफ्तारी की घटना के बाद से मोहम्मद के पिता ने उन्हें उनके स्कूल से हटा लिया था.

मोहम्मद के अध्यापकों ने उनकी बनाई घड़ी को बम समझ लिया था, इसके बाद मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया गया था.

इस घटना के बाद मोहम्मद को व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया गया और कई वैज्ञानिक, राजनेता और फ़ेसबुक के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग जैसे सेलिब्रेटी उनके समर्थन में आगे आए थे.

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