चेक गणराज्य पर प्रवासियों से बदसलूकी का आरोप

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संयुक्त राष्ट्र ने चेक गणराज्य के सरकारी अधिकारियों पर प्रवासियों और शरणार्थियों के साथ बर्ताव में सुनियोजित तरीके से मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया है.

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार संस्था के अध्यक्ष ने कहा है कि चेक गणराज्य ने करीब 90 दिन तक प्रवासियों को अपमानजनक स्थिति में रखा.

ज़ैद राद अल हुसैन ने कहा कि हिरासत में लिए प्रवासियों के कपड़े उतरवाकर नकदी के लिए तलाशी ली गई.

हुसैन ने चेक गणराज्य के राष्ट्रपति मिलोश ज़िमान के 'इस्लामोफ़ोबिक' वाले बयान पर भी विरोध जताया.

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वहीं राष्ट्रपति मिलोश ज़िमान के प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रपति अब भी अपने बयान पर कायम हैं.

हुसैन ने कहा कि दूसरे देशों ने जहां प्रवासियों की आवाजाही पर निगरानी के लिए नीतियां लागू की हैं वहीं चेक गणराज्य अकेला ऐसा देश है जहाँ उन्हें लंबी अवधि के लिए हिरासत में रखा जाता है.

उन्होंने कहा है कि ऐसा लगता है कि ये कदम प्रवासियों और शरणार्थियों को चेक गणराज्य में प्रवेश करने या रहने से रोकने के लिए उठाए जा रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र अधिकारी ने कहा कि चेक न्याय मंत्री के मुताबिक एक हिरासत केन्द्र में किसी जेल से भी बदतर हालात हैं.

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