अंग्रेज़ी बोलने पर शरीफ़ के ख़िलाफ़ याचिका

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संयुक्त राष्ट्र महासभा में उर्दू में भाषण ना देने पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ पर अवमानना का केस चल सकता है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने पाकिस्तानी अख़बार द डॉन के हवाले से लिखा है, "मामले के याचिकाकर्ता ज़ाहिद ग़नी ने दावा किया है कि शरीफ ने आठ सितंबर के इस फैसले का पालन नहीं किया जिसके तहत तत्काल संघीय और प्रांतीय सरकारों को उर्दू का प्रयोग करने के निर्देश दिए थे."

सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा था कि वह संविधान के अनुच्छेद 251 को लागू करने की कोशिशें तेज़ करे ताकि उर्दू को पाकिस्तान की आधिकारिक भाषा बनाया जा सके.

कोर्ट ने ये भी कहा था कि नेताओं और अधिकारियों को अपने भाषणों और औपचारिक संवादों में अंग्रेज़ी की जगह उर्दू का इस्तेमाल करना चाहिए.

पीटीआई के मुताबिक याचिकाकर्ता ने कहा है कि प्रधानमंत्री शरीफ़ ने इस तरह अपराध किया है और उन पर मुकदमा चलना चाहिए.

इस तरह की ये दूसरी याचिका है. लेकिन पाकिस्तान में प्रधानमंत्री के खिलाफ याचिका दायर करना नई बात नहीं है

26 अप्रैल 2012 में तत्कालीन प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी को अवमानना के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक मिनट से भी कम अवधि की प्रतीकात्मक सज़ा दी थी.

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