तुर्की में राष्ट्रपति एर्दोआन की पार्टी को जीत

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तुर्की की सत्ताधारी जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी(एकेपी) ने संसदीय चुनावों में जीत हासिल की है.

अब जबकि मतों की गिनती का काम लगभग पूरा हो गया है, सरकारी एजेंसी अनादोलू के मुताबिक एकेपी ने 49.4 फीसदी वोट हासिल किए हैं.

मुख्य विपक्षी दल सीएचपी को 25.4 फीसदी वोट मिले हैं.

प्रधानमंत्री अहमद दावुतोगलु ने चुनाव के नतीजों को, ''लोकतंत्र और हमारे लोगों की जीत’’ कहा है.

कुर्दों का समर्थन करने वाली पार्टी एचडीपी ने सीटों पर दावा करने के लिए जरूरी 10 फीसदी वोट की सीमा हासिल कर ली है.

राष्ट्रवादियों के दल एमएचपी को भी अंकारा में सीटें हासिल हुई हैं.

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तुर्की में पांच महीनों में दूसरी बार चुनाव हुए हैं.

जून में हुए चुनाव के बाद गठबंधन सरकार बनाने में नाकाम होने के बाद राष्ट्रपति एर्दोआन ने कहा था कि अगर उनकी पार्टी को बहुमत मिला तो स्थिर सरकार बनाएंगे.

बीबीसी संवाददाताओं के मुताबिक़ एकेपी पार्टी अकेले ही सरकार बनाने में कामयाब हो सकती है.

पिछले चुनाव में गठबंधन को नकारने वाली धुर दक्षिणपंथी पार्टी एमएचपी को लोगों ने पूरी तरह नकार दिया है.

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उम्मीद से बड़ी जीत का जश्न एकेपी के मुख्यालय और दूसरी जगहों पर नजर आ रहा है.

पांच महीने में ही दूसरी बार चुनाव करा कर एकेपी ने बड़ा दांव खेला था लेकिन फैसला उसके हक़ में रहा.

लेकिन आखिर ये हुआ कैसे? पार्टी का रुख साफ था उसने पहले से ही लोगों को यकीन दिलाना शुरू कर दिया था कि स्थिर सरकार और हिंसा का खात्मा सिर्फ वही दे सकती है.

बीते दिनें कुर्द चरमपंथियों के हमले और इस्लामिक इस्टेट के बढ़ते खतरे को ध्यान में रख कर उन्हें वोट दिया ताकि वो शांति बहाल कर सकें.

विपक्षी पार्टियों ने कहा था कि इस चुनाव से लोगों को एर्दोआन की बढ़ती तानाशाही प्रवृत्ति को रोकने का मौक़ा मिला है.

तुर्की में कुर्द और इस्लामी लड़ाकों के हमलों के बीच सुरक्षा का मुद्दा भी चुनाव में छाया रहा है.

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