60 साल में पहली बार चीन-ताइवान वार्ता

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चीन और ताइवान की बीच सिंगपुर में 60 साल के बाद ऐतिहासिक बातचीत हुई.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ताइवान के राष्ट्रपति मा यिंग-जीओ का मुलाकात से पहले हाथ मिलाना, एक बड़ा संकेत माना जा रहा है.

चीन ताइवान को अलग हुआ एक प्रांत मानता है जिसका एक न एक दिन मुख्य भूमि में विलय होगा.लेकिन ताइवान के लोग खुद को स्वतंत्र मानते हैं और चीन के बढ़ते वर्चस्व को लेकर चिंतित हैं.

1949 में चीन में गृह युद्ध के समाप्त होने के बाद यह पहला मौक़ा है जब दोनों देशों के नेताओं की मुलाक़ात हुई है.

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राष्ट्रपति मा ने बैठक शुरू होने से पहले कहा, "दोनों तरफ़ के लोगों को एक दूसरे के मूल्यों और ज़िन्दगी के तरीकों का सम्मान करना चाहिए."

वहीं शी जिनपिंग ने कहा, "हम एक परिवार हैं. ताइवान स्ट्रेट (जलडमरु मध्य) के दोनों तरफ़ के नेताओं की बैठक ने दोनों तरफ़ के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है. इतिहास में इस दिन को याद रखा जाएगा."

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राष्ट्रपति मा के 2008 में सत्ता संभालने के बाद चीन और ताइवान के बीच आर्थिक, पर्यटन और व्यापार क्षेत्र में कई समझौते होने से संबंध बेहतर हुए हैं.

1949 में कुओमिनतांग पार्टी को कम्युनिस्ट पार्टी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था और उसने ताइवान में नई सरकार का गठन कर लिया था. तब से चीन और ताइवान अलग हो गए थे.

बैठक में कोई ख़ास समझौता नहीं हुआ और न ही दक्षिण चीन सागर के विवाद पर चर्चा हुई.

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