शनि ग्रह के चंद्रमा पर पानी के संकेत

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नासा का कसिनी स्पेसक्राफ्ट अब तक के अंतरिक्षीय इतिहास में शनि ग्रह के उपग्रह एनसिलेडस के सबसे नज़दीक तक पहुंचने में कामयाब हुआ है.

इस दौरान स्पेसक्राफ्ट ने उपग्रह की सतह की ऐसी तस्वीरें ली हैं जो नए रहस्यों को समझने में मदद करेगी.

शनि ग्रह की पृथ्वी से दूरी बदलती रहती है, क्योंकि दोनों गतिशील हैं. लेकिन जब दोनों एक दूसरे के नजदीक होते हैं तब ये दूरी करीब 1.2 अरब किलोमीटर की होती है. यह दूरी पृथ्वी की सूर्य से दूरी से आठ गुना ज़्यादा है.

वैसे एनसिलेडस उपग्रह पृथ्वी से करीब 1.4 अरब किलोमीटर दूर स्थित है.

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स्पेसक्राफ्ट एनसिलेडस के 49 किलोमीटर नज़दीक तक पहुंचने में कामयाब रहा और इस दौरान उसने जो तस्वीरें ली हैं, उनसे इस उपग्रह की प्रकृति के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी.

इस कहानी में इस्तेमाल की गई तस्वीरों को स्पेसक्राफ्ट ने 28 अक्टूबर, 2015 को खींचा था. इन तस्वीरों के साथ किसी तरह की कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है.

इन मूल तस्वीरों से ज़ाहिर हो रहा है कि एनसिलेडस पर पानी के अंश मौजूद हैं. इससे इस उपग्रह पर भी जीवन की संभावना तलाशी जा रही है.

वैज्ञानिकों के मुताबिक अब पृथ्वी के बाहर जिन ग्रहों-उपग्रहों पर जीवन संभव हो सकता है, उस रेस में एनसिलेडस सबसे आगे है.

इससे पहले मंगल ग्रह और पृथ्वी जैसे एक मिलते जुलते आकाशीय पिंड में पानी मिलने के संकेत मिले हैं.

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कैलिफ़ोर्निया के पासाडीना स्थित नासा की जेट प्रोपल्सन लेबॉरेटरी की प्रोजेक्ट मिशन साइंटिस्ट लिंडा स्पील्कर कहती हैं, "कसिनी की तस्वीरें शानदार हैं. इनसे हमें एनसिलेडस को काफी नज़दीक से देखने का मौका मिला है. लेकिन अभी वैज्ञानिक तौर पर काफी चौंकाने वाली जानकारी आनी बाक़ी है."

ज़ाहिर है वैज्ञानिक समुदाय को इन तस्वीरों के विस्तृत अध्ययन के नतीजों का इंतज़ार है.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी अर्थ पर उपलब्ध है.

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