कॉफी और डाइट सॉफ़्ट ड्रिंक कितने नुकसानदेह?

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खान-पान की चीज़ों को लेकर भी ख़तरे कम नहीं होते. कोई चीज़ कितनी फ़ायदेमंद या हानिकारक है, इसे लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति रहती है.

कॉफी और डाइट सॉफ़्ट ड्रिंक में मौजूद स्वीटनर से भी कोई ख़तरा हो सकता है?

क्या ज़्यादा कॉफी पीना वाकई ख़तरनाक है या फिर चिंता की कोई बात नहीं है? क्या डाइट ड्रिंक के स्वीटनर से कैंसर हो सकता है, पढ़िए.

कॉफी

डर- ज़्यादा कॉफी पीने से दिल का दौरा पड़ सकता है.

वास्तविकता क्या है- इसको लेकर ज़्यादा सबूत नहीं हैं कि कॉफी पीने से मौत का ख़तरा बढ़ सकता है. हालांकि इससे उलट बात ज़रूर सही है.

2012 में 'न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ़ मेडिसिन' ने 13 साल के दौरान क़रीब चार लाख लोगों के स्वास्थ्य पर आधारित रिपोर्ट प्रकाशित की.

इसमें वैज्ञानिकों ने पाया कि जो लोग रोज़ाना तीन से छह कप कॉफी पी रहे थे उनमें इन 13 सालों के दौरान मरने की आशंका 10 फ़ीसदी कम हो गई.

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इतना ही नहीं, इससे दिल का दौरा और हृदय की दूसरी बीमारियों के अलावा स्ट्रोक, डायबिटीज़ और संक्रमण का ख़तरा कम हो जाता है.

2014 में क़रीब दस लाख लोगों के स्वास्थ्य के बारे में जारी अध्ययन में भी यही अंदाज़ा मिला.

इसमें कहा गया कि कॉफी नहीं पीने वालों की तुलना में रोज़ाना चार कप कॉफी पीने वालों में मरने का ख़तरा 16 फ़ीसदी कम होता है.

हालांकि यह सब केवल विश्लेषणात्मक शोध ही है. अब तक ये पता नहीं चल पाया है कि कॉफी हमारे दिल की सुरक्षा करती है या कोई और वजह है जो मालूम नहीं है.

मुमकिन है कि स्वस्थ लोग कॉफी के प्रति कहीं ज़्यादा आकर्षित होते हों लेकिन अगर आपको कॉफी की लत पड़ जाए तो भी वह हानिकारक नहीं है.

कॉफी अमृत भले नहीं हो लेकिन सुबह-सुबह आप आराम से कॉफी पीने का आनंद तो ले सकते हैं.

डाइट सॉफ़्ट ड्रिंक्स

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डर- इसमें मौजूद कृत्रिम चीनी से कैंसर का ख़तरा बढ़ता है.

वास्तविकता क्या है- हम जानते हैं कि ज़्यादा चीनी से मोटापा, डायबिटीज़ और हृदय संबंधी बीमारियों का ख़तरा बढ़ता है. लेकिन डाइट ड्रिंक्स में मौजूद कृत्रिम स्वीटनर का क्या असर होता है?

एक आम डर यह है कि ये ट्यूमर बढ़ाते हैं. लेकिन अमरीका के नैशनल कैंसर इंस्टीट्यूट में हुए शोध के मुताबिक़ कृत्रिम चीनी के तौर पर सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाले एसपारटेम के इस्तेमाल से ना तो ब्रेन कैंसर का ख़तरा बढ़ता है और न ल्यूकेमिया और न ही लिंफ़ोमा जैसी समस्या होती है.

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वैसे इस कृत्रिम चीनी के इस्तेमाल से टाइप 2 की डायबिटीज़ का ख़तरा बताया जाता है लेकिन इसकी भी पुष्टि नहीं हुई है.

यानी कृत्रिम स्वीटनर चीनी के मुकाबले में स्वास्थ्य के लिए बेहतर हो सकता है.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.

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