बिहारियों ने दफ़न की मोदी की कट्टरपंथी सियासत: पाक मीडिया

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बिहार के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की हार आज पाकिस्तान के सभी प्रमुख उर्दू अख़बारों की पहली ख़़बर है.

‘नवा-ए-वक़्त’ ने सुर्ख़ी लगाई है- मोदी को बड़ा झटका, बिहार में बीजेपी को शर्मनाक हार का सामना. अख़बार लिखता है कि बिहार के लोगों ने गाय कार्ड और कट्टरपंथी नीतियों को ख़ारिज कर दिया है.

इसके अलावा आरेजीडी मुखिया लालू यादव के इस बयान का ज़िक्र भी अख़बार ने किया है कि मोदी को गुजरात जाना पड़ेगा. वहीं केजरीवाल के हवाला से लिखा गया है कि बिहार के नतीजे नफ़रत की सियासत करने के वालों के मुंह पर तमांचा है.

‘जंग’ लिखता है कि कट्टरपंथी राजनीतिक मोदी सरकार को ले डूबी, बिहार में बदतरीन शिकस्त, इसी साल फ़रवरी में दिल्ली चुनाव हारने के बाद बीजेपी को बिहार में लगातार दूसरी पराजय मिली है.

‘जंग’ की राय है कि मोदी ने बिहार को अपनी नाक का सवाल बना लिया है और अगर वो बिहार में जीत जाते तो इससे उनकी ताक़त में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा होता.

अख़बार कहता है कि बिहार में मिली हार के बाद मोदी के लिए आरएसएस और उससे जुड़े कट्टरपंथी हिंदू संगठनों को क़ाबू करना और मुश्किल होगा.

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‘एक्सप्रेस’ लिखता है कि बिहार चुनाव नतीजों के बाद नीतीश कुमार की सियासी हैसियत बढ़ गई है और आने वाले दिनों में वो मोदी के ख़िलाफ़ एक नए मोर्चे के गठन की धुरी बन सकते हैं.

अख़बार लिखता है कि जल्द ही भारत के कई और राज्यों में चुनाव होने हैं और ये वक़्त ही बताएगा कि मोदी कौन सा रास्ता अख़्तियार करते हैं.

अख़बार की टिप्पणी है कि बिहार के चुनावों में नफ़रत और असहिष्णुता की हार हुई है.

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रोज़नामा ‘पाकिस्तान’ का कहना है कि मोदी ने बिहार का चुनाव जीतने के लिए क्या कुछ नहीं किया, लेकिन सब बेकार चला गया.

अखबार कहता है कि पाकिस्तान से जानबूझ कर रिश्ते ख़राब किए, नियंत्रण रेखा पर तनाव पैदा किया, भारत में हिंदुओं की भावनाओं को भड़काया गया, गोहत्या का मुद्दा उठाया गया, पाकिस्तानी विरोधी भावनाओं को हवा दी गई और मोदी ने बिहार में 30 रैलियां भी की, लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ.

अख़बार लिखता है कि बिहार के चुनाव नतीजों के बाद मोदी सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ तेज़ होगी और विपक्ष देश भर में मोदी विरोधी लहर को फैलाने की कोशिश करेगा.

वहीं बिहार चुनाव पर रोज़नामा ‘इंसाफ़’ की सुर्ख़ी है- बिहारियों ने मोदी की कट्टरपंथी सियासत को दफ़न कर दिया.

अख़बार ने चुनाव नतीजों के बाद भाजपा की सहयोगी शिवसेना के इस बयान को तवज्जो दी है जिसने कहा कि इस हार की पूरी ज़िम्मेदार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर है, जिनके मुक़ाबले नीतीश कुमार बिहार में हीरो बन कर उभरे हैं.

इसके अलावा ‘इंसाफ’ समेत सभी अख़बारों में आरजेडी मुखिया लालू प्रसाद का ये बयान भी है कि मोदी को सत्ता में रखना देश के टुकड़े टुकड़े करने के बराबर है.

रोज़नामा ‘वक़्त’ ने बाहों में बाहें डाले लालू और नीतीश की तस्वीर के साथ सुर्ख़ी लगाई है- मोदी की पार्टी की ज़बरदस्त हार.

‘दुनिया’ ने बिहार नतीजों के बाद सोशल मीडिया की सरगर्मियों का हवाला देते हुए लिखा- मोदी जी गाय दूध देती है, वोट नहीं.

दादरी में गोमांस की अफ़वाह पर एक व्यक्ति की हत्या और फ़रीदाबाद में दो दलित बच्चों को जलाकर मारे जाने की घटनाओं का ज़िक्र करते हुए लिखा है कि इन घटनाओं ने बिहार में चुनाव प्रचार का तापमान बढ़ाए रखा.

रोज़नामा ‘ख़बरें’ ने बिहार के चुनावी नतीजों पर लिखा-पाकिस्तान का विरोध भी काम नहीं आया.

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