चीन में अब भी दी जाती है यातना: एमनेस्टी

चीन में यातनाएं इमेज कॉपीरइट Getty

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चीन पर मानवाधिकार हनन के गंभीर आरोप लगाए हैं. मानवाधिकार संगठन की नई रिपोर्ट के मुताबिक़ भरोसा दिलाने के बावजूद चीन संदिग्धों से गुनाह क़बूल कराने के लिए यातनाएं दे रहा है.

इमेज कॉपीरइट amnesty international

एमनेस्टी इंटरनेशन का ये दावा वकीलों से मिली जानकारियों पर आधारित है. क़रीब 40 वकीलों के इंटरव्यू के बाद ये बात सामने आई है की चीन में अब भी संदिग्धों से पूछताछ के दौरान मारपीट की जाती है और गुनाह क़बूल कराने के लिए यातना कुर्सी पर बिठाना और जगाकर रखने जैसे पुराने तरीक़ों का इस्तेमाल जारी है.

संयुक्त राष्ट्र की ओर से चीन के मानवाधिकारों पर जांच के ठीक हफ़्ते भर पहले एमनेस्टी इंटरनेशनल की ये रिपोर्ट सामने आई है.

बीजिंग से बीबीसी संवाददाता सिलिया हेटॉन ने एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, "चीन में अभी भी लोहे से दाग़कर, लगातार मारकर और भूखा रखकर यातनाएं दी जाती हैं."

इमेज कॉपीरइट AFP

चीन में मामलों की सुनवाई सबूतों के बजाए क़बूलनामे पर आधारित होती है. पुलिस उस न्याय व्यवस्था के तहत काम करती है जहां पुलिस संदेह के आधार पर किसी को भी गिरफ्तार कर सकती है और उसे किसी गोपनीय स्थान पर ले जाकर महीनों तक शारीरिक और मानसिक यातनाएं देकर गुनाह क़बूल करा सकती है. कई बार पुलिस संदिग्धों को 6 महीनों तक उसके परिवार और वकीलों से दूर रखकर पूछताछ करती है.

इमेज कॉपीरइट AFP

एमनेस्टी के मुताबिक़ अपने मुवक्किल पर हुई यातनाओं की जांच करने वाले वकीलों को भी अमूमन प्रशासन की ज़्यादतियों का सामना करना पड़ता है.

चीन ने एमनेस्टी के आरोपों का अब तक खंडन नहीं किया है. हालांकि चीनी अधिकारियों ने कहा है कि वो यातना देने की प्रक्रिया को ख़त्म करने के लिए क़दम उठा रहे हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉयड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)