ब्रितानी सिखों को उम्मीद, मांगें मानेंगे मोदी

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ब्रितानी सिख समुदाय का एक प्रतिनिधि मंडल शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेगा.

इस मुलाक़ात में सिखों की मांगों पर चर्चा होगी.

लंदन में बीबीसी हिंदी को दिए एक इंटरव्यू में एक प्रमुख नेता गुरमेल सिंह मलहि ने कहा कि वह प्रधानमंत्री से 1984 के दंगों को नरसंहार घोषित करने की मांग करेंगे. सिखों की ये भी मांग होगी कि भारत सरकार इन दंगों के दोषियों के ख़िलाफ़ तेज़ी से एक्शन ले.

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए इन दंगों में केवल दिल्ली ही में लगभग 3000 सिख मारे गए थे.

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गुरमेल सिंह के अनुसार उनकी कई और अहम मांगें हैं.

"भारत सरकार सिखों की काली सूची (ब्लैक लिस्ट) को ख़त्म करे और सिखों की भारत वापसी की पाबंदी उठा ले. कुछ ऐसे सिख हैं जिनके खिलाफ केसे हैं उन्हें भारत आने दिया जाए ताकि वे अपना मुक़दमा लड़ सकें."

"इसके इलावा दुनिया भर के कई देशों में सिखों ने राजनीतिक शरण ली हुई है. इनमें से बहुत से भारत वापस जाना चाहते हैं लेकिन उन्हें पासपोर्ट, वीज़ा नहीं मिलता. उन्हें वापस जाने की इजाज़त दी जाए."

तो क्या उन्हें उम्मीद है कि उनकी मांगें पूरी की जाएंगी?

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गुरमेल सिंह कहते हैं, "बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से एक नई उम्मीद जगी है. मोदी वैश्विक दृष्टि वाले प्रधानमंत्री हैं. वह अफसरशाही को ख़त्म करना चाहते हैं और एक अच्छा माहौल बनाना चाहते हैं. उम्मीद तो है."

दरअसल परदे के पीछे केंद्र सरकार और सिख नेताओं के बीच कई महीनों से बातचीत जारी है.

गुरमेल सिंह बताते हैं, "हम दिल्ली गए हैं, गृह मंत्री से मिले हैं. यहां भारतीय दूतावास में भी बातचीत हुई है. हमने अपनी मांगें रखी हैं."

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ब्रिटेन और कनाडा में अलगाववादी ख़ालिस्तानियों की कोई कमी नहीं. भारत में कुछ लोगों को डर है कि इस बातचीत में कहीं अलगाववादी न घुस आएं. गुरमेल सिंह के अनुसार वह सारी मांगें भारतीय संविधान के दायरे में उठा रहे हैं.

पंजाब में हालिया सियासी बेचैनी भी प्रधानमंत्री और सिख दल की बातचीत के मुद्दों में शामिल होगी.

ब्रिटेन में रह रहे सिखों में कई मोदी विरोधी हैं और प्रधानमंत्री का ब्रिटेन में विरोध करने वालों में शामिल हैं. लेकिन सिख समुदाय के अधिकतर लोग नरेंद्र मोदी में एक ऐसा व्यक्ति देख रहे हैं जो मुश्किल फैसले लेने की क्षमता रखते हैं.

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गुरमेल सिंह के अनुसार उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री अपनी ब्रिटेन यात्रा के दौरान सिखों के बारे में कुछ फैसलों का ऐलान करेंगे. यहां रह रहे भारतीय पत्रकारों में भी इस पर चर्चा हो रही है लेकिन सरकारी तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है.

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