'मुंबई हमलों जैसी रणनीति पेरिस में अपनाई'

मुंबई हमले के दौरान ताज होटल से उठता धुंआ. इमेज कॉपीरइट AFP

पेरिस में शनिवार को जिस तरह का हमला हुआ, वैसी ही रणनीति 26 नवंबर 2008 को भारत के मुंबई पर हुए आतंकी हमले के लिए भी अपनाई गई थी.

पिछली रात पेरिस में जो कुछ भी हुआ, उसकी आशंका यूरोप की सुरक्षा एजंसियां बहुत पहले से जता रही थीं और उसे विफल करने की कोशिश कर रही थीं.

एजंसियों ने स्वचालित हथियारों से लैस आत्मघाती हमलावरों के एक साथ कई जगह घूम-घूम कर प्रमुख यूरोपिय शहरों में हमले करने, कई निशाने बनाने और भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर हमले की आशंका जताई थी.

इसी तरह की रणनीति 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर हुए हमले और कहीं अन्य जगहों पर हुए हमलों में भी अपनाई गई थी.

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हमलावर यूरोप में आए कैसे, इस तरह के कई सवालों के जवाब अभी आने बाकी हैं.

हमलावर क्या फ्रांस के नागरिक थे. अगर हाँ तो वो इतने स्वच्छंद कैसे हो गए, हथियार कहाँ से जुटाए और संगठित कैसे हुए?

उन्हें किसने मदद की? उनका पता क्यों नहीं लगाया जा सका? इस साल हुए दो बड़े हमलों के बाद क्या फ्रांस असुरक्षित हो गया है?

पेरिस में हुए हमले का क्या यह मतलब हुआ कि यूरोप में सार्वजनिक जगहों और आयोजनों को नए तरह के ख़तरों का सामना करना पड़ रहा है?

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अगर यह साबित हो गया कि इस हमले में सीरिया का हाथ है तो क्या फ्रांस सीरिया विवाद से पीछे हट जाएगा या वह कट्टरपंथी गुटों के खिलाफ लड़ाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और बढ़ा देगा.

मुंबई हुए हमलों में क़रीब 165 लोगों की मौत हुई थी. इनमें कुछ विदेशी नागरिक भी शामिल थे. दस में से नौ हमलावर सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में मारे गए थे.

अजमल कसाब नाम के हमलावर को ज़िंदा पकड़ा गया था, जिन्हें बाद में फांसी दे दी गई थी.

मुंबई हमले के लिए भारत पाकिस्तान के चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैबा को जिम्मेदार ठहराता है. पाकिस्तान पहले इससे इनकार करता रहा. लेकिन बाद में स्वीकार किया कि कसाब पाकिस्तानी नागरिक है.

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